डेस्क खबरबिलासपुर

सड़क की दरारों ने खोली भ्रष्टाचार की पोल ,डेढ़ साल में दो फाड़ हुई सड़क! बिलासपुर निगम के वार्ड 64 का मामला ! अब ठेकेदार से लेकर अफसर तक सवालों के घेरे में ?



डेस्क खबर बिलासपुर..बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 64 महामाया नगर में करोड़ों रुपये के विकास दावों की हकीकत सड़क पर बिखरी नजर आ रही है। नगर निगम चुनाव से पहले नवंबर 2023 में धान खरीदी केंद्र के पास बनाई गई करीब 900 मीटर लंबी सड़क अब बीचों-बीच फटकर दो हिस्सों में बंट गई है। सड़क में आई लंबी दरारें न केवल निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही हैं बल्कि सड़क निर्माण में अफ़सरों की शह पर बड़े भ्रष्टाचार को उजागर करती नजर आ रही है। ठेकेदार ने जमकर भ्रष्टाचार करते हुए जनता के टैक्स से हासिल सरकारी धन को हासिल किया है।



स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता को लेकर कई बार आशंकाएं जताई गई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि डेढ़-दो साल भी नहीं बीते और सड़क जवाब दे गई। अब सड़क पर चलना भी लोगों के लिए जोखिम भरा हो गया है।


सड़क टूटने के साथ ही मामला सियासी रंग भी पकड़ चुका है। वर्तमान निर्दलीय पार्षद ऊधोराम साहू ने पूर्व जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल में हुए निर्माण पर भ्रष्टाचार और घटिया गुणवत्ता के आरोप लगाए हैं। वहीं पूर्व पार्षद पति एवं वर्तमान एल्डरमैन संतोष दुबे ने पलटवार करते हुए सड़क की बदहाली के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार, तत्कालीन महापौर रामशरण यादव और निर्माण एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन सड़क की दरारें भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रही हैं।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर निर्माण के समय गुणवत्ता की जांच किसने की? भुगतान से पहले तकनीकी अधिकारियों ने सड़क को फिटनेस प्रमाणपत्र किस आधार पर दिया? यदि निर्माण में मानकों से समझौता हुआ है तो संबंधित ठेकेदार, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब देखना होगा कि इस घटिया निर्माण और सड़क में हुए भ्रष्टाचार की जांच कब तक होती है और कब तक जिम्मेदार अफसरों पर कार्यवाही होती है।

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