
डेस्क खबर ../ वाड्रफनगर पुलिस चौकी क्षेत्र में छात्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। गंभीर आरोपों के बावजूद शिक्षा विभाग अब तक केवल जांच का हवाला देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालता नजर आ रहा है।
पीड़ित छात्रा की शिकायत पर 5 दिसंबर को पुलिस ने आरोपी शिक्षक के विरुद्ध FIR दर्ज की थी। FIR दर्ज होने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि शिक्षा विभाग आरोपी शिक्षक के खिलाफ त्वरित विभागीय कार्रवाई करेगा, लेकिन आज तक न तो निलंबन हुआ और न ही कोई अनुशासनात्मक कदम उठाया गया। यह स्थिति विभाग की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी शिक्षक अब तक फरार है, इसके बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से कोई सख्त रुख सामने नहीं आया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि “मामले की जांच की जा रही है”, लेकिन सवाल यह है कि जब FIR दर्ज हो चुकी है तो जांच की आड़ में कार्रवाई क्यों रोकी जा रही है?

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग आरोपी शिक्षक को बचाने का प्रयास कर रहा है। यदि आरोपी किसी अन्य वर्ग से होता तो अब तक उस पर सख्त कार्रवाई हो चुकी होती, लेकिन शिक्षक होने के कारण विभागीय संरक्षण मिल रहा है। यही कारण है कि पीड़ित परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की निष्क्रियता ने छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। स्कूल और शिक्षा संस्थान जहां बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान माने जाते हैं, वहीं जब ऐसे मामलों में विभाग चुप्पी साध ले, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी शिक्षक के खिलाफ पहले भी मौखिक शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन विभाग ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। अब जब मामला पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है, तब भी शिक्षा विभाग का ढुलमुल रवैया यह दर्शाता है कि विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है।

पुलिस की ओर से आरोपी की तलाश जारी होने की बात कही जा रही है, लेकिन शिक्षा विभाग की तरफ से कोई ठोस बयान या कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। क्या शिक्षा विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर आरोपी को बचाने के लिए जानबूझकर देरी की जा रही है?
इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना सख्त कार्रवाई के केवल जांच की बात करना न्याय नहीं होता। पीड़ित छात्रा और उसके परिजन आज भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं, वहीं आम जनता की निगाहें अब शिक्षा विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग कब अपनी जिम्मेदारी निभाता है और आरोपी शिक्षक के खिलाफ ठोस कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।