इंजीनियर दिवस तभी सार्थक, जब विश्वेश्वरैया के आदर्श जीवन में उतरें ,राष्ट्र निर्माण में अभियंताओं की भूमिका अहम, लेकिन समारोह से आगे बढ़कर जनसेवा की जरूरत !


रिपोर्ट –जनार्दन पाल सेवानिवृत्त महाप्रबंधक (सुरक्षा), एनटीपीसी
डेस्क खबर बिलासपुर ../ भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती देशभर में अभियंता दिवस के रूप में मनाई गई। यह दिन देश के विकास में अभियंताओं के योगदान को याद करने का अवसर है। इसमें कोई दो राय नहीं कि देश की तरक्की में इंजीनियरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल समारोह आयोजित कर इंजीनियर दिवस मनाने से हमारा दायित्व पूरा हो जाता है? दरअसल, इंजीनियर दिवस की असली सार्थकता तभी है, जब हम विश्वेश्वरैया जी के जीवन और उनके आदर्शों से सीख लेकर उन्हें अपने काम और व्यवहार में उतारें। विश्वेश्वरैया जी का पूरा जीवन मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने इंजीनियरिंग को केवल नौकरी या पेशा नहीं माना, बल्कि इसे देश और समाज के विकास का माध्यम बनाया। यही कारण है कि आज भी उनका नाम देश के महान अभियंताओं में सम्मान के साथ लिया जाता है।
आज जरूरत है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई और पेशे को केवल नौकरी पाने का जरिया न माना जाए। इंजीनियर अपनी तकनीकी योग्यता का उपयोग समाज और देश की समस्याओं को दूर करने में करें। गांवों में बेहतर सड़कें, पानी की व्यवस्था, बिजली, सिंचाई, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में अभियंता महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
दूसरी बड़ी चिंता इंजीनियरिंग शिक्षा को लेकर है। आज इंजीनियरिंग की पढ़ाई लगातार महंगी होती जा रही है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बच्चों को इंजीनियर बनाना आसान नहीं रह गया है। दूसरी ओर, लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय है।
इस दिशा में सरकार, शिक्षण संस्थानों और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलकर गंभीर प्रयास करने होंगे। इंजीनियरिंग शिक्षा को सस्ता, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक बनाना समय की जरूरत है।
विश्वेश्वरैया जी ने अपने कर्म से यह साबित किया था कि एक इंजीनियर केवल इमारतें और योजनाएं नहीं बनाता, वह देश का भविष्य भी बनाता है।
इसलिए आज आवश्यकता केवल विश्वेश्वरैया जी को याद करने की नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने की है। यदि हम अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाते हुए तन, मन, वचन और कर्म से राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित हों, तभी अभियंता दिवस मनाना वास्तव में सार्थक होगा और यही भारत रत्न सर विश्वेश्वरैया जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
