


रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाली पंडवानी की दिग्गज कलाकार और पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत तीजन बाई अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उनके निधन से लोककला जगत में गहरा शोक व्याप्त है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं तीजन बाई ने रायपुर स्थित अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव ले जाया गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
तीजन बाई ने अपने जीवन को पंडवानी गायन के लिए समर्पित कर दिया। महाभारत की कथाओं को उन्होंने अपनी दमदार आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और अनूठी शैली के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया कि यह लोककला देश की सीमाओं से निकलकर दुनिया के कई देशों तक पहुंच गई। बचपन में परिवार के बुजुर्गों से मिली प्रेरणा ने उन्हें इस राह पर आगे बढ़ाया और कम उम्र में ही उन्होंने मंच पर अपनी अलग पहचान बना ली।
लोककला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया। उनके निधन पर देशभर के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जगत की हस्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें प्रदेश का गौरव बताते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा। तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला और विरासत सदैव जीवित रहेगी।