डेस्क खबर

बिलासपुर कलेक्टर के नोटिस से राजस्व विभाग में मची खलबली , कलेक्टर के नोटिस ने खोली राजस्व विभाग की पोल ,पेंडिंग मामलों से हुए नाराज , SDM को थमाया नोटिस ..



डेस्क खबर बिलासपुर ../ छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के दौरान आम जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर एक तरफ जहां खुद मुख्यमंत्री उड़न खटोला से आकस्मिक दौरे जनता के बीच पहुंचकर जमीनी हकीकत टटोलने का प्रयास करते हुए मौके पर समाधान कर रहे है।वही दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के बिलासपुर दौरे से पहले जिले में राजस्व विभाग में पड़ी हजारों पेंडिंग देख बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल गंभीर और चिंतित नजर आ रहे है।। शिकायतों और फाइलों के अंबार को देखते हुए बिलासपुर कलेक्टर ने राजस्व मामलों की बढ़ती पेंडेंसी को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।
कलेक्टर द्वारा बिलासपुर एसडीएम मनीष साहू को सख्त नोटिस जारी करते हुए तत्काल मामलों के निराकरण के निर्देश जारी किए है। हालांकि इस नोटिस प्रशासनिक सख्ती से ज्यादा जनता को राहत देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। कलेक्टर ने साफ संकेत दिए हैं कि आम लोगों को जमीन संबंधी मामलों में वर्षों तक भटकना न पड़े और राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का जल्द निराकरण हो।जानकारी के अनुसार जिले में नामांतरण, डायवर्सन, बंटवारा, त्रुटिपूर्ण खसरा सुधार और विवादित जमीनों से जुड़े बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। कई प्रकरण वर्षों पुराने बताए जा रहे हैं। इसी स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही तय करते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।


कलेक्टर ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री के सुशासन तिहार के दौरान राजस्व मामलों की लगातार समीक्षा हो रही है और शिविरों में जनता की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता यही है कि लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान हो और उन्हें दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।



सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर जनता जाए तो जाए कहां?कोई नामांतरण के लिए भटक रहा है…
कोई बंटवारे के लिए सालों से इंतजार कर रहा है…
तो किसी की जमीन का रिकॉर्ड तक दुरुस्त नहीं हो पा रहा। बातचीत में मिली जानकारी के मुताबिक तहसील और एसडीएम कार्यालयों में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। लोग सीधे-सीधे अधिकारियों की कार्यशैली को कोस रहे हैं। आरोप है कि फाइलें आगे बढ़ाने में महीनों नहीं बल्कि सालों लग जा रहे हैं। कलेक्टर संजय अपने पत्र में यह भी माना है कि कई पुराने राजस्व रिकॉर्ड पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और उन्हें ऑनलाइन करने की जरूरत है। लेकिन सवाल यही है कि जब मूल रिकॉर्ड ही बिखरे पड़े हैं तो जनता को समय पर न्याय कैसे मिलेगा?
ई-कोर्ट के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। जिले में कुल 6411 राजस्व प्रकरण लंबित बताए गए हैं… जबकि सिर्फ बिलासपुर अनुभाग में ही 530 मामले पेंडिंग हैं। यानी हालात सिर्फ खराब नहीं… बल्कि सिस्टम की सुस्ती अब जनता के धैर्य की परीक्षा लेने लगी है। कलेक्टर ने साफ चेतावनी दी है कि एसडीएम कोर्ट ही नहीं… तहसीलदार और अतिरिक्त तहसीलदार न्यायालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। अब देखना होगा कि नोटिस के बाद अफसरों की नींद खुलती है या फिर जनता यूं ही फाइलों के ढेर में न्याय तलाशती रहेगी और यूंही सिर्फ नोटिस के जरिए सिर्फ कागज़ों में सख्ती जनता के बीच आती रहेगी ।

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