
डेस्क खबर बिलासपुर../ बिलासपुर प्रेस क्लब के सदस्यों को शासन द्वारा दी गई जमीन में पद का दुरुपयोग कर मनमर्जी से जमीन रजिस्ट्री करने वाले खेल का जल्द खुलासा होने वाला है । प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा की शिकायत के बाद बिलासपुर प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति की पत्रकार कॉलोनी में जमीन के बंदरबांट और नियम विरुद्ध बिक्री के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। वर्षों से विवादों और शिकायतों में घिरी इस बेशकीमती जमीन पर अब प्रशासन ने विधिवत सीमांकन और दस्तावेजों की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही नियमों के खिलाफ बेची गई जमीनों की रजिस्ट्रियों को शून्य घोषित करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। गौरतलब है कि जमीन के आबंटन में भारी गड़बड़ी करते हुए अपने चहेतों की गुपचुप तरीके से रजिस्ट्री कर दी गई ।पत्रकारों के आवास के लिए आवंटित इस जमीन पर लंबे समय से अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। आरोप है कि पुरानी कार्यकारिणी के कार्यकाल में जमीन आवंटन और रखरखाव में भारी गड़बड़ियां हुईं। जरूरतमंद पत्रकार अपने हक के लिए भटकते रहे, जबकि कुछ लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर जमीन को निजी मुनाफे का जरिया बना लिया।

समिति के बायलाज के अनुसार आवंटित जमीन पर केवल मकान बनाकर स्वयं निवास करने का प्रावधान है। किसी भी स्थिति में उस जमीन को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचना नियम विरुद्ध है। इसके बावजूद कई आवंटियों ने जमीन को बाहरी लोगों को बेच दिया। अब प्रशासन ऐसे सभी मामलों की जांच कर दूसरी बिक्री यानी रजिस्ट्री को रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगा।इस पूरे मामले को सामने लाने में प्रेस क्लब के मौजूदा अध्यक्ष अजीत मिश्रा की अहम भूमिका रही। उन्होंने पुराने रिकॉर्ड खंगालकर प्रशासन को तथ्यात्मक शिकायत भेजी, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया।
अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा 24 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के अनुसार मौजा बिरकोना स्थित पत्रकार कॉलोनी की जमीनों—खसरा नंबर 1340/27, 1340/4 और 1260/2—का सीमांकन किया जाएगा। इसके लिए 4 सदस्यीय विशेष राजस्व टीम गठित की गई है। जांच दल को मौके पर निरीक्षण, पंचनामा, नक्शा और राजस्व अभिलेखों के साथ 20 मई 2026 से पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस कार्रवाई से कई बड़े नामों के बेनकाब होने की संभावना है। गौरतलब है कि शासन ने 30 एकड़ सरकारी रकबा की जमीन में करीब साढ़े 10 एकड़ जमीन प्रेस क्लब के सदस्यों के लिए आबंटित की थी इतना ही नहीं आरोप है कि गृह निर्माण समिति में नए सदस्य बनाने में भारी अनियमितताएं की गई है और कई सीनियर प्रेस क्लब सदस्यों की जगह अपने चहेतों को सदस्य बनाकर सीनियर प्रेस क्लब सदस्यों के साथ नाइंसाफी की गई थी। वही पूरे मामले में भूमिहीन पत्रकारों में भी हर्ष की लहर है और उम्मीद जताई जा रही सीमांकन और जांच के बाद पत्रकारों के लिए दी गई जमीन में बड़े घोटाले का चौंकाने वाला खुलासा हो सकता है ।