डेस्क खबरबिलासपुर

जीपीएम: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 10 लाख का पुल, पहली बारिश में ही सड़कों से टूटा ‘रिश्ता’ !




डेस्क खबर .गौरेला-पेंड्रा-मरवाही../ इंजीनियरिंग के अजूबों की फेहरिस्त में अब मरवाही ब्लॉक के ग्राम पंचायत मगुरदा की एक ऐसी तस्वीर शामिल हो गई है, जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। यहाँ शासन ने ग्रामीणों की सहूलियत के लिए लाखों रुपये खर्च कर पुल तो खड़ा कर दिया, लेकिन आज वह पुल सुविधा के बजाय लोगों के लिए जानलेवा मुसीबत बन चुका है। मरवाही का यह आमा-झिरिया नाला मानसून के दौरान अक्सर उफान पर रहता है, जिससे कटरा और कांसबहरा जैसे गांवों का संपर्क अपनी ही पंचायत से कट जाता है। लोगों को महज कुछ मीटर की दूरी तय करने के लिए 10 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। इसी परेशानी को दूर करने के लिए साल भर पहले करीब 10 लाख की लागत से यहाँ एक पुल का निर्माण कराया गया था, पर पहली ही बारिश ने सिस्टम के दावों और भ्रष्टाचार की कलई खोलकर रख दी है।


तस्वीरें गवाह हैं कि पुल के दोनों तरफ की मिट्टी की सड़कें पानी में बह चुकी हैं और अब यह कंक्रीट का ढांचा बीच नाले में एक टापू की तरह अलग-थलग खड़ा है। ताज्जुब की बात यह है कि इस पुल को किसी मजबूत कंक्रीट की नींव के बजाय महज पत्थरों के ढेर पर टिका दिया गया है। नाले की चौड़ाई और पानी के बहाव के आकलन में हुई भारी चूक का नतीजा यह हुआ कि यह छोटा सा पुल पानी का दबाव ही नहीं झेल पाया। आज आलम यह है कि ग्रामीण इस ‘सफेद हाथी’ बन चुके पुल के बगल से, खेतों की पथरीली और ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों से जान जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर हैं। घने जंगल के बीच स्थित इस रास्ते पर राहगीर आए दिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं। इस पूरे मामले ने ठेकेदार की कार्यप्रणाली, इंजीनियर के मूल्यांकन सत्यापन और पंचायत की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह पानी में बहाने का जिम्मेदार कौन है। अब देखना होगा कि कब प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जांच करता है और दोषियों पर कार्यवाही .??

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