बहुचर्चित पोराबाई फर्जीवाड़ा : 17 साल बाद पोरा बाई मेरिट सूची फर्जीवाड़ा प्रकरण में बड़ा फैसला, चार दोषियों को 5-5 साल की सजा ! जो पापी है बच गए हम निर्दोष फंस गए आरोपी का सोशल मीडिया में बयान बना चर्चा का विषय !!



डेस्क खबर – छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के शिक्षा विभाग से जुड़े प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल पोरा बाई मेरिट सूची फर्जीवाड़ा प्रकरण में आखिरकार 17 साल बाद बड़ा फैसला सामने आया है।द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जी. आर. पटेल के न्यायालय ने अपील की सुनवाई पूरी करते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया है।न्यायालय ने छात्रा पोरा बाई, फूलसाय नृशी, एस. एल. जाटव और दीपक जाटव को 5-5 वर्ष की कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।यह मामला वर्ष 2008 का है, जब बिर्रा हायर सेकेंडरी स्कूल की 12वीं बोर्ड परीक्षा में दस्तावेजों में हेराफेरी और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। आरोप था कि परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर छात्रा पोरा बाई को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।इस प्रकरण में पहले वर्ष 2020 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, चांपा की अदालत ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था।
इसके खिलाफ शासन की ओर से अपील दायर की गई थी। अपील पर सुनवाई करते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सजा सुनाई है।फैसले के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में हलचल मची हुई है। शिक्षा विभाग में यह मामला लंबे समय तक “पोरा बाई फर्जीवाड़ा प्रकरण” के नाम से जाना जाता रहा और इसे विभाग का सबसे चर्चित व विवादित मामला माना जाता था।अब 17 साल बाद आए इस फैसले को लोग देर से मिला न्याय बता रहे हैं, वहीं यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक अहम संदेश माना जा रहा है। वही पूरे मामले में आरोपी ने कहा कि जो पापी है वो बच गए हम निर्दोष है इसलिए फंस गए । यह बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है ।