डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट –31 : राशन घोटाला: सरकारी चावल की कालाबाजारी ,दुकानों में फैली जानलेवा गंदगी ? पुख्ता प्रमाण के बाद भी खाद्य नियंत्रक ने दिया दोषियों को अभयदान ??  रजत जयंती चावल उत्सव के अंतिम दिन भी सवालों के घेरे में राशन व्यवस्था.??

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डेस्क खबर बिलासपुर ../ शासन द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ रजत जयंती चावल उत्सव का आज अंतिम दिन है, लेकिन उत्सव की चमक-दमक के बीच राशन दुकानों में व्याप्त अव्यवस्था और लापरवाही की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में वायरल हुए वीडियो ने दो राशन दुकानों की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।वायरल फुटेज में दुकानों में गंदगी, अव्यवस्थित भंडारण और चूहों के आतंक जैसी गंभीर जानलेवा स्थितियां साफ दिखाई दे रही हैं। इन दृश्यों के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। वहीं, प्रशासनिक महकमे में भी हड़कंप मच गया है और राशन दुकानों के संचालक संभावित कार्रवाई की आशंका से सहमे हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि राशन दुकानों में सामने आई अनियमितताओं पर खाद्य निरीक्षक अमृत कुजूर सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर मामला औपचारिक निरीक्षण तक ही सीमित रह जाएगा। चर्चा यह भी है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में कहीं कार्रवाई टाल न दी जाए।



छत्तीसगढ़ में रजत जयंती महोत्सव जहां सरकारी उपलब्धियों का उत्सव बनकर सामने आ रहा है, वहीं बिलासपुर के मगरपारा क्षेत्र की एक राशन दुकान की जांच के पुख्ता प्रमाण के बाद भी दोषी संचालक के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने से  प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है .??  कार्रवाई के नाम पर दुकान को निलंबित तो कर दिया गया, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज न होना संदेह को और गहरा कर रहा है कि आखिरकार तत्कालीन कलेक्टर और तत्कालीन खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया की जांच रिपोर्ट के बाद भी मगरपारा स्थित दुकान संचालक और विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय को किसके संरक्षण में विभाग द्वारा उच्चन्यायालय और कलेक्टर को गुमराह कर अभयदान दिया जा रहा है ?? राजनैतिक दबाव या रिश्तेदारी संरक्षण .??
वार्ड क्रमांक 23, मगरपारा स्थित राशन दुकान (आईडी 401001096) में 07 जून 2025 को खाद्य विभाग ने जांच की थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और हितग्राहियों की शिकायतों के आधार पर हुई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि महिला समूह के विक्रेता पात्र हितग्राहियों से चावल के बदले अवैध रूप से पैसे वसूल रहे थे। आरोप सही पाए जाने के बाद 30 जुलाई 2025 को कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा ने दुकान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।



मामले में महिला समूह की अध्यक्ष सत्यशीला उपाध्याय, सचिव पुष्पा दीक्षित और विक्रेता ऋषि उपाध्याय के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत प्रकरण बनना बताया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामले में अब तक थाने में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। विभागीय सूत्रों की माने तो खाद्य विभाग में बैठे अधिकारी और राजनैतिक लोगों से अपने रिश्ते की सुगबुगाहट के कारण प्रमाणित जांच रिपोर्ट के बाद भी इस मामले में कानूनी कार्रवाई को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एफआईआर में हो रही देरी उठने से सवाल उठना लाजिमी है ।अब जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगा या कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई कर भरोसा बहाल करेगा।

सहित कुछ दुकानदारों का भी यही कहना है  कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है। अब सभी की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि निरीक्षण महज दिखावा साबित होगा या फिर राशन व्यवस्था की साख बचाने के लिए कठोर कार्रवाई की जाएगी या एक बार फिर खाद्य विभाग के अधिकारी बिलासपुर उच्च न्यायालय से लेकर कलेक्टर को गुमराह कर इसी तरह कालाबाजारी और राशन की अफरा तफरी करने वाले बचाने का काम करते रहेंगे ??

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