


डेस्क खबर बिलासपुर ../ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर में शासकीय राशन की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है । एक तरफ जहां केंद्र और राज्य सरकार गरीबों को पेट भर खाना देने के लिए मुफ्त या कम कीमतों पर राशन उपलब्ध करवा रहे है तो जिले में अधिकांश दुकान इन सरकारी राशन के बदले नगद पैसा देते हुए कैमरे में कैद हो रहे है । लगातार सरकारी राशन की दुकानों में कालाबाजारी को रोकने में खाद्य विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है । सूत्रों के हवाले से मिले वीडियो में दावा किया जा रहा है कि बिलासपुर के सिरगिट्टी में स्थित जिला थोक सहकारी उपभोक्ता भंडार के नाम से संचालित सरकारी राशन दुकान में चावल के बदले नगद पैसा दिया जा रहा है । और बाद में इसी चावल को खुले बाजार में कालाबाजारी करते हुए जमकर मुनाफा खोरी कर रहे है ।

शहर में शासकीय राशन की कालाबाजारी का मामला कोई नया नहीं है, लेकिन इस बार सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी चावल चोरों पर कार्रवाई करने की बजाय खाद्य विभाग उन्हें बचाने में क्यों लगा है। बिलासपुर खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर के पास विक्रेता संघ के अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ मजबूत विभागीय जांच रिपोर्ट होने के बावजूद भी उनके खिलाफ अब तक सख्त कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दरअसल, जय महालक्ष्मी महिला सहायता समूह द्वारा संचालित उचित मूल्य की दुकान में चावल के बदले सीधे नगदी वसूली का वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय खुलेआम सरकारी चावल बेचते दिखाई दिए थे। इस घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने जांच के आदेश दिए थे। विभागीय अधिकारियों अनुराग भदौरिया, अजय मौर्य और श्याम वस्त्रकार ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें नमक, शक्कर और चावल के गबन की पुष्टि हुई। साथ ही तीनों आरोपियों—ऋषि उपाध्याय, उनकी पत्नी व दुकान की अध्यक्ष सत्यशीला उपाध्याय और सचिव पुष्पा दीक्षित—के इस कृत्य को आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत दंडनीय अपराध माना गया और एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई।

इसके बावजूद, आरोपियों पर अब तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। दुकान को अस्थायी रूप से निलंबित जरूर किया गया, परंतु वहीं तक कार्यवाही सीमित रह गई। यहां तक कि जब मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, तब भी खाद्य विभाग द्वारा अपनी ही जांच रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई, जिसका सीधा लाभ आरोपियों को मिला।
सूत्रों के मुताबिक, विभाग के अंदर ही कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल संचालित हो रहा है। कई संचालकों का दावा है कि ऋषि उपाध्याय और गोविंद नायडू स्वयं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने का हवाला देकर विभाग में दबदबा बनाए हुए हैं। यही वजह है कि कई बार अनियमितताओं की शिकायतें और वीडियो वायरल होने के बावजूद भी उन पर हाथ डालने में विभाग पीछे हटता दिख रहा है। बिलासपुर जिले में समय-समय पर PDS वितरण में गड़बड़ी के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन जब संघ के बड़े पदों पर बैठे लोग ही इस घोटाले में शामिल हों और जिम्मेदार अधिकारी जांच रिपोर्ट दबाकर बैठ जाएं, तो गरीब हितग्राहियों का न्याय मिलना सवालों के घेरे में आ जाता है। अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले में शासन-प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर सरकारी चावल की काली कमाई का यह खेल इसी तरह चलता रहेगा। और दबाव में मामले का खुलासा करने वालों के ही खिलाफ कार्यवाही होती रहेगी ।
