डेस्क खबरबिलासपुर

सिस्टम का असली कानून: चोरी करो इनाम पाओ, सच बोलो तो सज़ा खाओ”..क्या वाकई आजाद है हम ??



डेस्क खबर बिलासपुर ../ आज का भारत एक अजीब पाठ पढ़ा रहा है — गलती करना गुनाह नहीं, बल्कि उसे छुपाना ही असली काबिलियत है। और जो बेवकूफ़ इसे उजागर कर दे, उसके लिए सिस्टम के पास मिठाई से लेकर झूठे मुकदमों तक का ‘स्पेशल गिफ्ट पैक’ तैयार है।
गलती पकड़ने पर सबसे पहले दोषी की तलाश नहीं, बल्कि यह पड़ताल शुरू होती है कि — “ये आवाज़ किसकी है, और इतनी हिम्मत कैसे हुई?” फिर शुरू होता है दबाव का तीन-स्तरीय पाठ्यक्रम — पहले रिश्वत की मिठास, फिर धमकी की मिर्च, और अंत में झूठे केस का ज़हर।
कुछ अधिकारियों और पदाधिकारियों  के पाले हुए ‘चमचों’ की तो अलग ही पहचान है। ये लोग गलती ढकने को कला, और चापलूसी को धर्म मान चुके हैं। झूठ को सच का रंग चढ़ाना और सच बोलने वालों की इमेज तार-तार करना, इनकी रोज़ की दिनचर्या है। अगर यही मेहनत जनता की भलाई में लगे, तो शायद देश आधा बेहतर हो जाए।


विडंबना देखिए — जहां जनता के लिए एकजुटता चाहिए, वहां टूट-फूट है; और जहां गलती को बचाना हो, वहां लोहे की दीवार खड़ी हो जाती है। साथी की गलती चाहे पहाड़ जैसी हो, पूरा विभाग उसे ढकने में जुट जाता है, लेकिन सच बोलने वाला अकेला, असहाय छोड़ दिया जाता है। लेकिन सच के साथ ईमानदारी और निष्पक्षता भी खड़ी रहती है जिसके चलते चोर और चापलूस बैकफुट में भी नजर आते है ।
आज सिस्टम में सबसे खतरनाक काम है — गलती उजागर करना। क्योंकि यहां गुनाहगार सुरक्षित है, और गुनाह बताने वाला संदिग्ध, अपराधी और ‘सबक सिखाने लायक’ माना जाता है।
आजाद भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता के खिलाफ चल रही प्रशानिक कड़ाई के बाद यह सवाल उठता है क्या लोकतंत्र में क्या सचमुच आजाद है हम .??

error: Content is protected !!