एनटीपीसी की राख डंपिंग पर बवाल: नदी तट से बाईपास तक अवैध भराव के आरोप, पांच माह से आंदोलनरत ग्रामीण*
*गतौरा क्षेत्र में राख परिवहन और डंपिंग की व्यवस्था पर उठे सवाल; पंचायत व प्रशासनिक अनुमति के बिना भराव का आरोप, अटल बाजार के पास राख खाली करते समय वाहन पलटा*..,NTPC प्रबंधन सवालों के घेरे में !!




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डेस्क खबर बिलासपुर-सीपत एनटीपीसी से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राखड़) के परिवहन और निस्तारण को लेकर बिलासपुर जिले के गतौरा, फरहदा, पंधी और मोपका बाईपास क्षेत्र में विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने राख के कथित अवैध परिवहन, नदी किनारे डंपिंग, सड़क किनारे भराव और वाहनों में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना आवश्यक अनुमति के रिहायशी इलाकों और जलस्रोतों के आसपास राख डंप की जा रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। इस मामले को लेकर ग्रामीण पिछले पांच महीनों से आंदोलनरत होने का दावा कर रहे हैं।
*न पंचायत की अनुमति, न प्रशासनिक स्वीकृति का दावा*
ग्रामीणों के अनुसार, राख के उपयोग अथवा निस्तारण के लिए संबंधित स्थल की स्थिति के आधार पर आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्राम पंचायत की अनुमति तथा संबंधित प्रशासनिक प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद गतौरा क्षेत्र के खुले मैदानों और आबादी के आसपास राख डंप किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों ने फरहदा नदी के किनारे राख डाले जाने तथा पंधी और मोपका बाईपास के आसपास सड़क किनारे भराव किए जाने पर भी आपत्ति जताई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि राख का परिवहन और निस्तारण नियमानुसार हो रहा है, तो संबंधित एजेंसियों को अनुमति-पत्र, परिवहन दस्तावेज और डंपिंग स्थलों से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
*पांच महीने से आंदोलन, कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी*
ग्रामीणों का आरोप है कि वे पिछले पांच महीनों से राख की कथित अवैध डंपिंग के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। आंदोलनकारियों ने संबंधित अधिकारियों और एनटीपीसी प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से परिवहन में लगे लोगों के हौसले बढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों ने एनटीपीसी के संबंधित अधिकारियों, सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने परिवहन, भुगतान और राख के निस्तारण से जुड़े अभिलेखों की जांच कराए जाने की मांग की है।
*फर्जी बिल्टी और नंबर प्लेट बदलने के आरोप*
मामले में आंदोलनकारियों ने राख परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कुछ वाहनों की बिल्टियां जबलपुर, बस्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्र और अन्य प्रदेशो के नाम पर तैयार किए जाते है, जबकि राख को निर्धारित गंतव्य तक ले जाने के बजाय आसपास के क्षेत्रों में ही डंप किए जाने की शिकायत है। आरोप यह भी है कि कुछ वाहन नंबर प्लेट बदलकर दोबारा परिवहन में लगाए जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे परिवहन व्यवस्था, राख के वास्तविक निस्तारण स्थल और संबंधित भुगतान की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने परिवहन दस्तावेजों, वाहन नंबरों, जीपीएस रिकॉर्ड और संबंधित भुगतान की जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है।
*अटल बाजार से लक्की ढाबा के बीच वाहन पलटने का मामला*
गतौरा अटल बाजार से लक्की ढाबा के बीच राख खाली करते समय एक भारी वाहन के पलटने की घटना भी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राख उतारने के दौरान वाहन का जैक रॉड टूटने से वह पलट गया। इस घटना को लेकर ग्रामीणों ने राख के परिवहन और डंपिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
एक जनप्रतिनिधि के रिश्तेदार पर आरोप लगाया गया है कि संबंधित स्थान पर बिना आवश्यक अनुमति के पटाई कराई जा रही थी। ग्रामीणों का दावा है कि इस कार्य के लिए ग्राम पंचायत, एसडीएम कार्यालय और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से जरूरी स्वीकृतियां नहीं ली गई थीं। वाहन की नंबर प्लेट गायब होने और संबंधित लोगों के मौके से चले जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन तथ्यों की प्रशासनिक जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
*एजीएम ने पेनल्टी की बात कही, बड़े मामले पर जवाब का इंतजार*
ग्रामीणों के अनुसार, एनटीपीसी के एजीएम अनंत वार्ष्णेय से संपर्क किए जाने पर उन्होंने नियमों के उल्लंघन की स्थिति में पेनल्टी लगाने की बात कही। हालांकि, आंदोलनकारियों का आरोप है कि राख के कथित अवैध परिवहन और हजारों ट्रिप से जुड़ी शिकायतों पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इस संबंध में एनटीपीसी प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
*आरटीओ उड़नदस्ता की भूमिका पर भी सवाल*
राख परिवहन में लगे भारी वाहनों के कथित फर्जी नंबर प्लेट और ओवरलोडिंग को लेकर परिवहन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने बिलासपुर आरटीओ के उड़नदस्ता दल की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत या संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में परिवहन विभाग के रिकॉर्ड, वाहनों की जांच रिपोर्ट और कार्रवाई संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
*पुराने मामले की कार्रवाई पर भी उठे सवाल*
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि पिछले वर्ष एक चर्चित ट्रांसपोर्टर से संबंधित बिल्टी का मामला सामने आया था, जिसे ग्रामीणों ने पकड़ा था, लेकिन उस प्रकरण में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इस पुराने मामले के दस्तावेज और पुलिस अथवा प्रशासन की कार्रवाई का विवरण सामने आने पर ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
*आंदोलन तेज करने की चेतावनी*
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि राख की कथित अवैध डंपिंग पर रोक नहीं लगाई गई और शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि खुले में उड़ती राख और जलस्रोतों के आसपास डंपिंग से पर्यावरण तथा स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि संबंधित डंपिंग स्थलों का निरीक्षण कराया जाए, अनुमति और परिवहन दस्तावेजों की जांच हो, राख के वास्तविक गंतव्य का सत्यापन किया जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि एनटीपीसी प्रबंधन, जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इन शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं।
