डेस्क खबर

मरवाही में वन्यजीव संरक्षण सप्ताह का भव्य समापन, बच्चों की प्रतिभा को मिला मंच*

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डेस्क खबर *मरवाही (जीपीएम)।* वन परिक्षेत्र मरवाही में पिछले एक सप्ताह से चल रहे वन्यजीव संरक्षण सप्ताह का आज गरिमामय समापन हुआ। “वन्यजीव सुरक्षित तो वन सुरक्षित, वन सुरक्षित तो हमारा भविष्य सुरक्षित” की थीम पर पूरे सप्ताह वन विभाग ने जागरूकता और सुरक्षा से जुड़े कई कार्यक्रम किए।सप्ताह के पहले दिन विभाग ने संवेदनशील वन क्षेत्रों में Anti-Snare Walk अभियान चलाया। टीम ने जंगल के अंदर लगे शिकारी फंदों और जालों को हटाया और अवैध शिकार रोकने के लिए विशेष गश्ती की।



दूसरे दिन हाथी-मानव और भालू-मानव द्वंद्व को रोकने के लिए जागरूकता रैली निकाली गई। वनकर्मियों ने बाइक और साइकिल से गांव-गांव जाकर लोगों को समझाया कि जंगल में हाथी या भालू दिखने पर कैसे सुरक्षित रहना है।



तीसरे दिन सभी वन प्रबंधन समितियों की बैठक बुलाई गई। इसमें ग्रामीणों को इस साल की वन्यजीव संरक्षण थीम और विभाग की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।



चौथे दिन स्कूली बच्चों के लिए निबंध, चित्रकला और पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों ने अपने चित्रों के माध्यम से जंगल बचाने का संदेश दिया।



पांचवें दिन वन विभाग की टीम ने जंगल के अंदर मौजूद प्राकृतिक जलस्रोतों, तालाबों और वन्यजीवों के रहवास स्थलों का निरीक्षण किया। जहां पानी की कमी थी वहां व्यवस्था दुरुस्त की गई।

छठवें दिन संवेदनशील इलाकों में देर रात तक विशेष रात्रि गश्ती अभियान चलाया गया ताकि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।


विद्यार्थियों की भागीदारी से हुआ समापन आज अंतिम दिन समापन समारोह में तीन अलग-अलग विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। बच्चों के बीच चित्रकला, निबंध लेखन, भाषण और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। जिन बच्चों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया उन्हें मंच से शील्ड देकर सम्मानित किया गया, जिससे बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला।कार्यक्रम के अंत में वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित सभी कर्मचारियों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने हाथ खड़ा कर सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि हम सभी मिलकर वन और वन्यजीवों की रक्षा और उनके संवर्धन के लिए हमेशा काम करेंगे।


विभाग का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता और खासकर नई पीढ़ी में जंगल और जानवरों के प्रति प्रेम और जागरूकता पैदा करना है, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।

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