डेस्क खबरबिलासपुर

सरकारी चावल की कथित हेराफेरी, गरीबों का चावल राइस मिल में? VIDEO से उठे सवाल
मोहतराई की मिल में पहुंची चावल से लदी गाड़ियां, राशन की कथित हेराफेरी का आरोप !



डेस्क खबर बिलासपुर../ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पेट भरने के लिए  गरीबों को बांटने के लिए सरकारी योजना के तहत मिलने वाले चावल की कथित हेराफेरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी राशन के बदले नगद पैसा देने के कई वीडियो के बाद अब इन सरकारी चावल को राइस मिलो में खपाए जाने के दावों के बीच  रतनपुर रोड के मोहतराई क्षेत्र स्थित राइस मिल एक VIDEO सामने आया है, जिसमें चावल से लदी तीन गाड़ियां दिखाई दे रही हैं। वीडियो में धान की बोरियां भी नजर आ रही हैं। दावा है कि गाड़ियों में सरकारी राशन का चावल भी था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।



सूत्रों और कुछ राशन दुकानदारों के अनुसार, जिले में उचित मूल्य दुकानों से चावल की कथित हेराफेरी कर उसे ऑटो और छोटी गाड़ियों से एकत्र किया जाता है। बाद में सिटी कोतवाली क्षेत्र से छोटी छोटी ऑटो के जरिए यह सरकारी चावल बड़े व्यापारियों तक और उसके बाद बड़ी गाड़ियों के जरिए राइस मिलों तक पहुंचाने के आरोप है और दावे भी किए जा रहे है।


दुकान से नकद, चावल बाहर करने का आरोप
दावा है कि कुछ दुकानों में हितग्राहियों को चावल देने के बजाय कथित तौर पर नकद राशि देकर चावल बाहर निकाला जाता है। इसके बाद इसे निजी कारोबारियों तक पहुंचाने की बात कही जा रही है। मामले की पुष्टि के लिए ई-पॉस रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर का मिलान जरूरी है।
परिवहन और GPS पर भी सवाल


सूत्रों ने सरकारी राशन के परिवहन में लगी गाड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ वाहन निर्धारित दुकानों तक चावल पहुंचाने के बजाय रास्ते में कथित तौर पर माल उतार देते हैं। यदि ऐसा है तो GPS रिकॉर्ड, परिवहन चालान और राशन दुकानों के स्टॉक की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। और यह सब खेल एक रसूखदार लंबे समय से बेखौफ होकर कर रहा है और इसी रसूखदार द्वारा परिवहन के लिए गाड़ियों के माध्यम से पहुंचने वाला सरकारी राशन उचित मूल्य की दुकानों में न भेजकर अपने गोदाम और घर में खाली करवा कर सफेद बोरियो में पलट कर रोज लाखों रु की अवैध कमाई की जा रही है। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि जिले में आबंटित सरकारी राशन का 50 फीसदी से ज्यादा चावल इसी रसूखदार व्यापारी द्वारा अकेले खपा कर जमकर कालाबाजारी और मुनाफाखोरी खुलेआम दिन दहाड़े की जा रही है ।

अब विभाग के सामने जांच की चुनौती
मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि VIDEO में दिखाई दे रहा चावल सरकारी है या नहीं और वह राइस मिल तक किस दस्तावेज के आधार पर पहुंचा। इसके लिए राइस मिल का स्टॉक रजिस्टर, खरीदी रिकॉर्ड, वाहनों के दस्तावेज और राशन दुकानों के वितरण रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
गरीबों के हक के राशन से जुड़े इस मामले में अब निगाह खाद्य विभाग की कार्रवाई पर है। VIDEO और दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला महज आरोप है या वास्तव में सरकारी चावल की हेराफेरी का सिंडिकेट नेटवर्क सक्रिय है।

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