कोरबाडेस्क खबर

गरीब मजदूर की मौत, अडाणी के रसूख के आगे सिस्टम बेबस? प्लांट गेट पर ट्रेलर ने ली कर्मी की जान, भारी वाहनों के जमावड़े और कथित अतिक्रमण पर सवाल..घटनास्थल में मोबाइल में व्यस्त दिखे पुलिसकर्मी .!!




डेस्क खबर कोरबा ../ एक गरीब मजदूर की जान चली गई, परिवार का सहारा छिन गया, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल है—क्या इस मौत के बाद जिम्मेदार व्यवस्था जागेगी? या बड़े औद्योगिक रसूख के सामने सरकारी सिस्टम की कार्रवाई फिर सवालों में घिर जाएगी? पताढ़ी स्थित अडाणी समूह के केपीएल प्लांट के मुख्य गेट पर रात्रि पाली में ड्यूटी करने जा रहे 45 वर्षीय मुकेश कैवर्त को कोयला लोड ट्रेलर क्रमांक CG 10 BO 0492 ने अपनी चपेट में ले लिया। सिर पर गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद साथी मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा और विरोध प्रदर्शन हुआ। ट्रेलर चालक के फरार होने की सूचना है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। वही इस मामले में सुबह पुलिस की गंभीरता का एक वीडियो भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी घटनास्थल में मोबाइल में पूरी तरह से व्यस्त नजर आ रहे है।



मजदूर की जान गई, अब जवाब कौन देगा?
प्लांट गेट के आसपास भारी वाहनों के जमावड़े, सड़क किनारे पार्किंग और शासकीय जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो संबंधित विभागों ने समय रहते व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाए? क्या कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल प्रबंधन की जिम्मेदारी है, या प्रशासन और यातायात व्यवस्था से जुड़े विभाग भी जवाबदेह हैं?
रसूख बड़ा या कानून?


बड़े उद्योगों के आसपास यातायात, पार्किंग और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। कानून का पालन हर किसी के लिए समान होना चाहिए। मुकेश कैवर्त की मौत के बाद असली परीक्षा यही है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर कार्रवाई किस पर होती है।
डंकाराम के सीधे सवाल: क्या प्लांट गेट के आसपास कथित अतिक्रमण और भारी वाहनों की पार्किंग की जांच होगी? क्या दुर्घटना के कारणों की पड़ताल कर जिम्मेदारी तय की जाएगी? और क्या मजदूरों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? क्योंकि किसी गरीब मजदूर की जिंदगी भी उतनी ही कीमती है, जितनी किसी बड़े रसूखदार की ??

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