डेस्क खबरबिलासपुर

मल्हार स्कूल में कथित मनमानी! 30 किमी दूर से कलेक्ट्रेट पहुंचीं छात्राएं, DEO का किया घेराव
मनमानी फीस, गाली-गलौज और FIR की धमकी के आरोप; सैनिटरी पैड के नाम पर वसूली और एक्सपायर्ड पैड बांटने की शिकायत से मचा हड़कंप




डेस्क खबर बिलासपुर../  जिस स्कूल में बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए, उसी स्कूल की शिकायतें लेकर विद्यार्थी कलेक्ट्रेट पहुंच जाएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। मल्हार के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कथित अव्यवस्थाओं को लेकर विद्यार्थियों का आक्रोश गुरुवार को खुलकर सामने आया। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत आवेदन सौंपे, नारेबाजी की और शिक्षा विभाग से तत्काल जांच की मांग की। । स्कूल में सुनवाई नहीं हुई तो छात्राओं ने सीधे कलेक्ट्रेट का दरवाजा खटखटाया। मल्हार के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल से करीब 30 किलोमीटर दूर पहुंचीं छात्राओं ने DEO का घेराव कर शिकायतों को लेकर जमकर आक्रोश जताया।


छात्राओं ने स्कूल प्रबंधन पर मनमानी फीस वसूली, प्राचार्य पर गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार तथा शिकायत करने पर FIR का डर दिखाने के आरोप लगाए। सैनिटरी पैड के नाम पर पैसे लेने और एक्सपायर्ड पैड बांटने की गंभी शिकायत ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार किया है।
अब सवाल सीधे शिक्षा विभाग से है—छात्राओं की शिकायतों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्कूल में व्यवस्था दुरुस्त थी, तो बच्चियों को 30 किलोमीटर दूर कलेक्ट्रेट तक क्यों आना पड़ा? क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या शिकायतें कागजों में ही दफन रह जाएंगी?


अधिकारी से शिकायतों पर हुई कार्रवाई का जवाब मांगा। उन्होंने निष्पक्ष जांच, शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्कूल में ऐसा क्या हुआ कि बच्चों को अपनी बात रखने के लिए कलेक्ट्रेट तक पहुंचना पड़ा? क्या विद्यालय स्तर पर उनकी शिकायतें नहीं सुनी गईं? यदि शिकायतें पहले भी की गई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि शिकायतें अब सामने आई हैं, तो शिक्षा विभाग जांच में कितनी तत्परता दिखाता है?
फिलहाल, ये सभी आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित प्राचार्य, शिक्षकों और शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। लेकिन विद्यार्थियों का इस तरह शिकायत लेकर अधिकारियों तक पहुंचना अपने आप में गंभीरता से ध्यान देने का विषय है।
अब जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है कि वह केवल आवेदन लेकर मामला ठंडे बस्ते में न डाले, बल्कि निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए। क्योंकि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को डर के माहौल में नहीं, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा मिलनी चाहिए।l

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