
डेस्क खबर छत्तीसगढ़ ।./ गांधी जयंती पर अशोक विश्वकर्मा ने ऐसी गांधीगिरी दिखाई कि लोग देखते ही रह गए! न कोई भाषण, न नारेबाजी और न ही कोई हंगामा… बस खुद स्टेच्यू बनकर अटल चौक पर खड़े हो गए! बागबहार के सिसरिंगा निवासी अशोक महात्मा गांधी के विचारों से इतने प्रभावित हैं कि गांधी जयंती पर खुद ही प्रतिमा बनने का फैसला कर लिया। अब आलम यह है कि अशोक को इस अंदाज में देखकर लोग सोच में पड़ रहे हैं—भाई साहब, ये स्टेच्यू हैं या गांधीगिरी का चलता-फिरता संदेश!
अशोक का संकल्प है कि वे दोपहर 1 बजे तक भूखे-प्यासे स्टेच्यू बनकर खड़े रहेंगे। मतलब आज न चाय की चुस्की, न नाश्ते का चक्कर… बस गांधीगिरी के नाम पर अडिग खड़े रहना!अटल चौक पर लोगों की नजरें अशोक पर टिकी हैं। कोई हैरान है, तो कोई उनके अनोखे अंदाज को देखकर मुस्कुरा रहा है।
गांधी जयंती पर अशोक का संदेश भी निराला है—गांधीगिरी दिखाने के लिए जरूरी नहीं कि माइक पकड़ा जाए, कभी-कभी चुपचाप खड़े रहकर भी लोगों का ध्यान खींचा जा सकता है!आज बागबहार में गांधीगिरी का अनोखा फंडा है—बापू के विचारों को सलाम, और अशोक की स्टेच्यू वाली गांधीगिरी को प्रणाम!
