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EXCLUSIVE : तखतपुर थाने में कानून का अपना हिसाब? गंभीर हादसा, घायल अस्पताल में… ट्रक 3 दिन थाने में… फिर थाने में  50 हजार में समझौता?


डेस्क खबर / ड्राइवर का दावा—गाड़ी छोड़ने के लिए भी मांगी गई रकम! बड़ा सवाल अधिकारी लेगे संज्ञान या करेंगे शिकायत का इंतजार ??
डेस्क खबर बिलासपुर ./ एक तरफ जहां प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर जिले में थाने कानून के हिसाब से चल रहे है तो दूसरी तरफ  तखतपुर थाने में अपना अलग ही कानून चल रहा है  की किताब चल रही है या फिर समझौते का कोई अलग सिस्टम? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि एक सड़क हादसे के बाद सामने आई ग्राउंड जीरो की तहकीकात ने हादसे की पूरी कहानी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।आरोप है कि हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक और ट्रक चालक के बीच थाने में समझौता कराकर बिना अपराध दर्ज किए दोनों पक्षों को रवाना कर दिया गया। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि घायल युवक का निजी अस्पताल में इलाज जारी है और परिजनों के मुताबिक अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
बताया जा रहा है कि ट्रक महाराष्ट्र की ओर जा रहा था। इसी दौरान सामने से आ रही बाइक की ट्रक से टक्कर हो गई। हादसे में बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। ट्रक चालक के मुताबिक सड़क खराब होने के कारण वह धीमी गति से अपनी साइड में वाहन चला रहा था, तभी गलत दिशा से तेज गति में आ रही बाइक सामने से ट्रक से टकरा गई।


चालक का कहना है कि हादसे के बाद वह मौके से भागने के बजाय अपने हेल्पर की मदद से घायल युवक को तत्काल निजी अस्पताल लेकर गया और पुलिस को सूचना देने के बाद ट्रक को खुद थाने में खड़ा कर दिया। और किसी गरीब की मदद करना और घटनास्थल से नहीं भागना ड्राइवर को महंगा पड़ गया और उसे 3 दिन से ज्यादा थाने के चक्कर लगाना पड़ा ।


परिजनों का आरोप—रिपोर्ट करना चाहते थे, फिर समझौता कैसे हुआ?
घायल युवक के परिजनों का दावा है कि वे मामले में रिपोर्ट दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन थाने में समझौते के लिए दबाव बनाया गया और करीब 50 हजार रुपये दिलाकर मामला खत्म करवा दिया गया। परिजनों के अनुसार घायल युवक की हालत गंभीर है और इलाज में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। वहीं ट्रक चालक का आरोप है कि उसका ट्रक पिछले तीन दिनों से थाने में खड़ा रहा। चालक के अनुसार बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया और घायल युवक को 50 हजार रुपये नकद और ऑनलाइन के जरिए भुगतान किया गया। चालक ने यह भी आरोप लगाया है कि ट्रक को थाने से बाहर निकालकर महाराष्ट्र ले जाने की अनुमति देने के एवज में उससे अलग से रकम तखतपुर थाना पुलिस ने ली है


हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
थाना प्रभारी बोले—दोनों पक्ष रिपोर्ट नहीं करना चाहते थे
मामले में जानकारी लेने पर तखतपुर थाना प्रभारी ने पहले तो ऐसी किसी की घटना की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया का कहना है कि दोनों पक्ष किसी तरह की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराना चाहते थे और आपसी सहमति से मामला समाप्त कर लिया गया। इसी आधार पर दोनों पक्षों को जाने दिया गया। दूसरी ओर, थाने में मौजूद कर्मचारियों द्वारा घटना से संबंधित आवक-जावक अथवा अन्य रिकॉर्ड की जानकारी नहीं होने की बात कही गई। थाना प्रभारी ने भी शुरुआती बातचीत में हादसे की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई, जबकि बाद में उन्होंने घटना और समझौते की जानकारी होने की बात कही।
अब उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि घायल युवक के परिजन वास्तव में रिपोर्ट करना चाहते थे और युवक का इलाज अभी भी गंभीर स्थिति में चल रहा है, तो महज 50 हजार रुपये में समझौता कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ?


दूसरा सवाल ट्रक चालक के आरोपों से जुड़ा है। यदि पुलिस के अनुसार दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से समझौता किया था, तो ट्रक को कई दिनों तक थाने में रखने की वजह क्या थी? वाहन छोड़ने के लिए रकम लेने के आरोप की भी निष्पक्ष जांच की जरूरत है।
सड़क हादसों में वाहन बीमा और उपलब्ध वैधानिक उपचार/मुआवजा प्रक्रियाओं के प्रावधान लागू हो सकते हैं। ऐसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के मामले को केवल आपसी समझौते तक सीमित करने से पहले सभी कानूनी पहलुओं की जांच हुई या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
और सबसे अहम सवाल—अगर इलाज के दौरान घायल युवक की हालत बिगड़ती है या कोई अप्रिय मेडिकल स्थिति पैदा होती है, तो उस स्थिति में इस समझौते की जिम्मेदारी कौन लेगा तखतपुर थाना की पुलिस या फिर ?


इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह नहीं है कि कौन क्या कह रहा है।
सवाल यह है कि थाने के रिकॉर्ड में क्या दर्ज है?
अगर ट्रक वास्तव में तीन दिन थाने में खड़ा रहा
थाने के रोजनामचा/डेली डायरी में इसकी एंट्री है या नहीं?
वाहन किस तारीख और किस समय थाने में दाखिल हुआ?
किस पुलिसकर्मी ने वाहन को परिसर में खड़ा कराया?
वाहन को किस आदेश पर और किस तारीख व समय छोड़ा गया?
वाहन की जब्ती हुई थी तो जब्ती पंचनामा कहां है?
यदि जब्ती नहीं हुई थी तो ट्रक को थाने में इतने समय तक क्यों रोका गया?
इन सवालों का जवाब किसी बयान से नहीं, थाने के रिकॉर्ड से मिल सकता है।
CCTV बताएगा—ट्रक कब आया और कब गया?
तखतपुर थाना परिसर में CCTV कैमरे लगे हैं या नहीं, और घटना की तारीख की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है या नहीं—यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है।
अगर CCTV फुटेज उपलब्ध है तो उससे यह पता लगाया जा सकता है कि—
ट्रक किस समय थाने में पहुंचा?
कौन उसे लेकर आया?
कितने समय तक परिसर में खड़ा रहा?
कब और किसके साथ उसे बाहर निकाला गया?
साथ ही उस अवधि में घायल पक्ष और ट्रक चालक की थाने में मौजूदगी भी रिकॉर्ड से स्पष्ट हो जाएगी
और सबसे बड़ा सवाल यह है किअगर गंभीर रूप से घायल युवक की हालत बिगड़ती है तो उस समय किया गया यह समझौता किस कानूनी आधार पर खड़ा रहेगा?

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