
डेस्क खबर बिलासपुर…/ जिले के मस्तूरी के एरमसाही धान खरीदी केंद्र में भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आई 920 क्विंटल धान की कमी ने खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक 10 दिसंबर 2025 को रिकॉर्ड में 5,890.80 क्विंटल धान होना था, जबकि मौके पर 4,970.80 क्विंटल ही मिला। इस तरह 920 क्विंटल की कमी सामने आई, जिसकी कीमत करीब 28.52 लाख रुपए बताई गई है।
मामले में पुलिस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार 920 क्विंटल में से 70 क्विंटल यानी 175 बोरी से संबंधित कथित फर्जी एंट्री का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना धान लाए किसान के नाम पर एंट्री कर भुगतान कराया गया। इस मामले में ऑपरेटर कांशीराम खूंटे की भूमिका का उल्लेख है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल बाकी 850 क्विंटल को लेकर है। 920 क्विंटल की कुल कमी में से 70 क्विंटल के मामले में कार्रवाई का उल्लेख है, तो शेष 850 क्विंटल की कमी का कारण क्या रहा? इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हुई? यही सवाल अब किसानों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
खाद मामले ने भी बढ़ाई चिंता
इसी एरमसाही समिति से जुड़े खाद वितरण को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। किसानों को मांगी गई खाद के स्थान पर दूसरी खाद देने, बिल और वास्तविक माल में कथित अंतर तथा अधिक कीमत लेने जैसे आरोपों की बात सामने आई है। इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित विभागीय जांच से स्पष्ट होनी है।

अब धनगवां में जिम्मेदारी की चर्चा
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि एरमसाही से जुड़े प्रबंधक बबलू घृतलहरे के वित्तीय अधिकार रोके जाने की जानकारी के बीच नए धनगवां धान खरीदी केंद्र में उन्हें जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। धनगवां नया केंद्र है और वहां अभी धान खरीदी शुरू नहीं हुई है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एरमसाही में 920 क्विंटल की कमी का पूरा हिसाब सामने आने से पहले नए केंद्र की जिम्मेदारी देने का आधार क्या है? किसानों की मांग है कि एरमसाही मामले में शेष 850 क्विंटल की कमी की जांच, CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल तथा जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।
डंकाराम के पास उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह सवाल उठाया जा रहा है। संबंधित व्यक्तियों और विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
