डेस्क खबरबिलासपुर

व्यापार विहार में ‘जमीन का खेल’! पहले निगम ने किया हेमा मलघानी और अज्ञात को नोटिस जारी .! अब खेल रहे अधिकारी अधिकारी ..आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?  हेमा और अज्ञात को बचाने की क्या हो रही साजिश ??




बिलासपुर। न्यायधानी के व्यापार विहार में जमीन को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। त्रिवेणी परिसर के पास निर्माणाधीन तीन दुकानों को लेकर नगर निगम के भीतर ही अलग-अलग दावे सामने आने से पूरे मामले पर सवाल उठ रहे हैं। जिन निर्माणों को पहले निगम की भूमि पर अवैध बताते हुए संपदा अधिकारी अंकुर पाण्डेय ने नोटिस जारी किया था, अब उन्हीं निर्माणों के संबंध में कहा जा रहा है कि संबंधित जमीन निजी स्वामित्व की है और किसी रात्रे के नाम से खरीदी जा चुकी है। जबकि कुछ मीडिया संस्थान की माने तो पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया गया था  अब वही जमीन निजी बताई जा रही। संपदा शाखा के बदलते दावों पर उठे गंभीर सवाल


सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पटवारी प्रतिवेदन और निगम के रिकॉर्ड के आधार पर जमीन निगम की थी, तो कुछ ही समय बाद वही जमीन निजी कैसे हो गई? यदि वास्तव में निजी थी, तो नोटिस किस आधार पर जारी किया गया? और यदि निगम की थी, तो अब रुख क्यों बदल गया?


व्यापार विहार की करोड़ों रुपये कीमत वाली जमीनों को लेकर वर्षों से विवाद चलता रहा है। रेलवे लाइन और व्यापार विहार के बीच का इलाका, जो कभी कचरे और दलदल से भरा रहता था, आज व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इसी के साथ यहां जमीनों पर दावेदारी और कब्जे के आरोप भी लगातार सामने आते रहे हैं।


चर्चा यह भी है कि इस पूरे खेल में कुछ प्रभावशाली जमीन कारोबारी, दलाल, जनप्रतिनिधि और निगम के कुछ अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय से सक्रिय हैं। यहां तक कि संपदा शाखा में दलालों के बैठकर फाइलों और दस्तावेजों के संचालन तक के आरोप पहले भी लग चुके हैं।
इसी बढ़ते विवाद के चलते नगर निगम मुख्यालय के तीसरे तल पर व्यापार विहार से जुड़े मामलों के लिए अलग संपदा शाखा कार्यालय तक बनाना पड़ा। सवाल यह है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई और अब भी विवाद खत्म क्यों नहीं हो रहे?
पूर्व मेयर पर भी लगे थे आरोप
व्यापार विहार की जमीनों को लेकर पूर्व महापौर रामशरण यादव पर भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। उन पर एक जमीन का टेंडर एमआईसी और सामान्य सभा से पारित कराने के एवज में 1.15 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाते हुए एसएसपी को लिखित शिकायत सौंपी गई थी। मामले में निगम ने तत्कालीन संपदा शाखा के कर्मचारी राजेश देवांगन को निलंबित भी किया था।
सीधी बात में क्या बोले अधिकारी?
जब संपदा अधिकारी अंकुर पाण्डेय से पूछा गया कि निगम की जमीन पर अवैध निर्माण के मामले में आगे क्या कार्रवाई हुई, तो उनका जवाब था कि अभी तक सीमांकन नहीं हो पाया है प्रक्रिया में है और हेमा मघलानी और अज्ञात के खिलाफ नोटिस जारी नोटिस का जबाव भवन अधिकारी ही दे सकते है । जबकि इसी मामले में भवन अधिकारी अनुपम तिवारी और उपायुक्त खंजाची इस नोटिस के बदले अनभिज्ञता जाहिर करते हुए पूरा ठीकरा संपदा अधिकारी अंकुर पांडे के ऊपर फोड़ कर उनसे ही जवाब लेने की नसीहत दे डाली ।
जबकि अंकुर पांडे ने कहा कि नोटिस पाने वाले पक्षों ने जवाब और जमीन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं और उन्हें भवन निर्माण की अनुमति भवन शाखा से मिल चुकी है । हालांकि यह सब दस्तावेज दिखाने की तैयार निगम को कोई विभाग तैयार नहीं है बस एक ही रटा रटाया जवाब की राजस्व रिकॉर्ड में जमीन निजी दिखाई दे रह। लेकिन जब उनसे संबंधित दस्तावेज दिखाने या जमीन किसके नाम थी, यह बताने को कहा गया, तो उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से जानकारी लेने की बात कही और यह कहते हुए दस्तावेज दिखाने से इनकार कर दिया कि प्रक्रिया गोपनीय है।
यही जवाब अब पूरे मामले को और अधिक संदेह के घेरे में खड़ा कर रहा है। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या रिकॉर्ड बदले हैं, या फिर कहानी बदली गई है? व्यापार विहार की करोड़ों की जमीनों पर आखिर किसका खेल चल रहा है और किसके संरक्षण में यह पूरा विवाद आगे बढ़ रहा है? अब इन सवालों के जवाब का इंतजार है जिसका चौंकाने वाला खुलासा आगामी अंकों में किया जाएगा आखिर कौन है हेमा मलघानी और अज्ञात क्या है सस्पेंस पूरा खुलासा जल्द ही ।

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