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अजब है गजब है यह सिटी कोतवाली पुलिस है ! आर्म्स एक्ट के आरोपियों को थाने में बैठाया, फिर छोड़ दिया… थाना प्रभारी बोले —कल कर लेगे  गिरफ्तार! बड़ा सवाल क्या TI के खिलाफ होगा एक्शन ??




डेस्क खबर बिलासपुर ,मुंगेली../ अजब है गजब है यह मुंगेली पुलिस है जी हा अब सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी कानून को अपनी जागीर समझने लगे है और अपनी मनमर्जी से कानून के दायरे से बाहर जाकर गंभीर मामले के आरोपी को गिरफ्तार किए बिना ही थाने से जाने दिया। कानून से ऊपर जाकर ti की कार्यप्रणाली और कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जितेंद्र साहू सहित चार लोगों को पुलिस घेराबंदी कर थाने लाई और करीब चार घंटे तक बैठाने के बाद छोड़ दिया। मामले में आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 लगाए जाने की बात सामने आ रही है।
सबसे ज्यादा सवाल अब थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े के कथित बयान को लेकर उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी ने कहा कि मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद आरोपियों को थाने से जाने दिया गया और अगले दिन गिरफ्तार किया जाएगा। थाना प्रभारी के इस अजीबो गरीबो बयान के बाद सवाल खड़े हो रहे है कि क्या मुंगेली पुलिस के अधिकारियों के निर्देश के बाद आर्म्स एक्ट के आरोपी को थाने से छोड़ दिया गया? या फिर उच्चाधिकारियों के संज्ञान में यह मामला लाया ही नहीं गया था ??
यहीं से पूरा मामला सवालों के घेरे में आ जाता है। अगर पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई का आधार मौजूद था, तो उन्हें थाने में घंटों बैठाने के बाद छोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या ऐसी कार्रवाई के लिए कोई स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई? क्या वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति ली गई थी? और अगर ली गई थी तो उसका रिकॉर्ड क्या है?बताया जा रहा है कि संबंधित लोगों की ओर सेधारा 354 से जुड़ी शिकायत भी की गई थी। हालांकि पूरे मामले में पुलिस रिकॉर्ड, धाराओं और कार्रवाई की वास्तविक स्थिति सामने आना बाकी है। यदि वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में आरोपियों को छोड़ा गया, तो इसकी स्पष्ट वजह सामने आनी चाहिए। यदि प्रक्रिया में चूक हुई, तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि मुंगेली एसपी और रेंज आईजी इस पूरे घटनाक्रम की जांच कराते हैं या नहीं। जांच से ही साफ होगा कि थाने से आरोपियों को छोड़े जाने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और क्या नियमों का पालन हुआ। फिलहाल सवाल सीधा है—आर्म्स एक्ट का मामला, चार घंटे थाने में मौजूदगी और फिर ‘कल हो जाएगी  गिरफ्तारी’ आखिर इस अजीबो गरीबो बयान देने का अधिकार थाना प्रभारी को किसने दिया वर्दी के रौब ने या फिर .??

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