

डेस्क खबर बिलासपुर ./ बिलासपुर जिले के खनिज विभाग की अनदेखी और मिलीभगत के चलते जिले के हर क्षेत्र में मिट्टी मुरूम रेत चोरी का खेल बेखौफ होकर चल रहा है । कोनी कोटा के बाद बिल्हा क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन का कारोबार बेखौफ तरीके से जारी है। रेत और मुरूम की चोरी से जुड़े इस खेल में जहां कुछ रसूखदार लोग करोड़पति बनते जा रहे हैं, वहीं संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस विभाग, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर और खनिज विभाग तक कई बार शिकायतें पहुंचाई जा चुकी हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। आरोप है कि नीचे से लेकर ऊपर तक अधिकारियों को मोटी रकम पहुंचने के कारण कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है।
यदि पूरे बिल्हा क्षेत्र की बात करें तो भैंसबोड़, देवकिरारी, भाटापारा, हथनी, बरतोरी, सेवती, पोड़ी, बुंदेला, उड़नताल, दगोरी, अमेंरी, कांपा, ताला, पौसरी, संबलपुरी, पेंडवा, केवाछी, मोहभट्ठा, रंहगी और मुढ़ीपार सहित कई गांवों में अवैध खनन का काम जोरों पर चल रहा है। फिलहाल नंगाराडी, सरवानी और पिरैया में यह गतिविधियां सबसे अधिक सक्रिय बताई जा रही हैं। नगाडराडीह गांव में तो पिछले कई महीनों से तालाब में 24 घंटे जेसीबी से खुदाई कर मिट्टी निकाली जा रही है, जिसे धनराज ईंट भट्ठा पहुंचाया जा रहा है। सूचना मिलने पर पटवारी मौके पर पहुंचे, लेकिन मशीनें पहले ही हटा दी गईं और केवल कागजी पंचनामा कर औपचारिकता पूरी कर दी गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी इसी मार्ग से गुजरते हैं, तो उन्हें यह अवैध गतिविधियां नजर क्यों नहीं आतीं? अब देखना होगा कि खबर के बाद प्रशासन जागता है या फिर यह करोड़ों का खेल यूं ही जारी रहता है।