डेस्क खबरबिलासपुर

जिला पंचायत में कामों की मंजूरी पर उठे सवाल, 15% लेनदेन के आरोपों से मचा हड़कंप.. शिकायतकर्ताओं का दावा—स्थानांतरण के बाद भी कुछ इंजीनियर नहीं हुए रिलीव; जनप्रतिनिधियों को जानकारी दिए बिना भेजे जा रहे प्रस्ताव, जरूरत वाले क्षेत्रों में काम अटकने का आरोप



डेस्क खबर बिलासपुर../  जिला पंचायत में विकास कार्यों की मंजूरी और प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। शिकायतकर्ताओं ने कामों में 15 प्रतिशत लेनदेन के कथित दबाव, स्थानांतरण के बाद भी कुछ इंजीनियरों को रिलीव नहीं किए जाने तथा जनप्रतिनिधियों को जानकारी दिए बिना स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष सहित अन्य कार्यों के प्रस्ताव भेजे जाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्क कोड और तकनीकी स्वीकृति (टीएस) के बाद भी कुछ कार्यों को रिवर्ट किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में काम की आवश्यकता है, वहां स्वीकृति नहीं मिल पा रही। आरोप है कि जिन स्थानों पर पहले ही काम स्वीकृत हो चुके हैं, उन्हीं क्षेत्रों में बार-बार प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों को जानकारी नहीं देने का आरोप

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक कार्यों की जानकारी समय पर जनप्रतिनिधियों को नहीं दी जा रही है। इससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका और छवि प्रभावित होने की बात कही जा रही है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुरानी शिकायतों के बाद भी कार्रवाई का इंतजार

शिकायतों में प्रवीण लठारे, अजय तिवारी, श्रीराम यादव सहित कुछ अन्य कर्मचारियों/अधिकारियों के नामों का उल्लेख किया गया है। अब जनपद स्तर के इंजीनियरों से जुड़े मामलों को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, कार्यों की स्वीकृति से लेकर तकनीकी स्वीकृति तक की फाइलों की जांच और स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल रिलीव करने की मांग की है।

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता पर जोर जरूरी

पंचायत एवं ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में ग्रामीण अधोसंरचना, आवास, सड़क, रोजगार और अन्य विकास कार्यों का सरकारी डेटा डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध कराया जाता है।  ऐसे में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कार्यवार प्रस्ताव, स्वीकृति, टीएस, वर्क कोड और रिवर्ट किए गए कार्यों की जानकारी सार्वजनिक रूप से जांची जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। अब देखना होगा कि लगातार सामने आ रही शिकायतों पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग क्या जांच कर कार्रवाई करता है।

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