

डेस्क खबर बिलासपुर../ बिल्हा विधानसभा में भले स्वास्थ्य सुविधाएं लचर स्थिति में हो लेकिन निजी प्रचार प्रसार में जिम्मेदार बहुत आगे नजर आ रहे है। सामने आई कुछ तस्वीरों के साथ शिकायत सच की पोल खोलती नजर आ रही है। शासकीय कार्यालय जनता के कामकाज के लिए होते हैं, किसी अधिकारी-कर्मचारी के निजी प्रचार या व्यक्तिगत उपलब्धियों के प्रदर्शन के लिए नहीं। बिल्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आंतरिक दीवारों पर लगी तस्वीरों को लेकर अब यही सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक अनिल गढ़ेवाल द्वारा कार्यालय की दीवारों का इस्तेमाल निजी फोटो एलबम की तरह किया गया। शिकायत में इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 सहित संबंधित विभागीय नियमों की भावना के विपरीत बताया गया है। शिकायतकर्ता ने शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के 15 सितंबर 2005 के निर्देश का हवाला देते हुए कहा है कि शासकीय भवनों और दीवारों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए किया जाना नियम विरुद्ध माना गया है और ऐसे मामलों में कार्रवाई के निर्देश हैं।


मामला केवल तस्वीरें लगाने तक सीमित नहीं है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अनिल गढ़ेवाल लंबे समय से बिल्हा स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ हैं और उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कुछ मामले जांच के दायरे में रहे हैं। इन आरोपों और जांच की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना बाकी है। सबसे गंभीर सवाल तत्कालीन बीएमओ और वर्तमान सीएमएचओ डॉ. शुभा गढ़ेवाल की भूमिका को लेकर उठाया गया है। शिकायत में दावा है कि कार्यालय की उन्हीं दीवारों के सामने बीएमओ द्वारा तस्वीरें खिंचवाई गईं, जिन्हें निजी फोटो प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता इसे कथित अनियमितता का समर्थन और संरक्षण मान रहा है।
सवाल यह भी है कि यदि तस्वीरों को लेकर आपत्ति सामने आई थी, तो उन्हें हटाने और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शासकीय कार्यालय के उपयोग और विभागीय आचरण से जुड़े नियमों की समीक्षा की?
अब पूरे मामले में जिला स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच, कार्यालय की दीवारों से निजी तस्वीरें हटाने और नियमों के अनुरूप जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।


फिलहाल आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी। ऐसे में सवाल यह है कि शासकीय कार्यालय की दीवारें आखिर सरकारी कामकाज का हिस्सा रहेंगी या फिर व्यक्तिगत प्रचार का मंच बनती रहेंगी या फिर ऐसे ही पब्लिक के टैक्स से पगार लेने वाले जिम्मेदार खुद का निजी प्रचार प्रसार करते रहेगे !
