


डेस्क खबर ../ बिलासपुर के सिरगिट्टी में करोड़ों रुपए की लागत से बन रही नाली अब विकास नहीं, बल्कि सवालों की नाली बन गई है। आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने सरकारी ट्रांसफॉर्मर से सीधे बिजली चोरी कर काम कराया। वीडियो सामने आया, बिजली विभाग ने करीब 77 हजार रुपए की पेनल्टी भी ठोक दी… लेकिन हैरानी की बात ये है कि आज तक एफआईआर नहीं हुई।सवाल ये है कि अगर यही बिजली चोरी किसी आम आदमी ने की होती, तो क्या सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता… या फिर उसी दिन पुलिस केस दर्ज कर जेल भेज दिया जाता? यही नहीं, इस नाली निर्माण पर पहले भी घटिया गुणवत्ता, नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोप लग चुके हैं। विभागों ने नोटिस दिए, चेतावनी दी, लेकिन कार्रवाई फाइलों से आगे नहीं बढ़ सकी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है… क्या रसूखदार ठेकेदारों के लिए कानून अलग है? क्या करोड़ों के सरकारी काम में नियम सिर्फ दिखावे के लिए हैं? और आखिर किसके संरक्षण में कार्रवाई की रफ्तार थम जाती है?
जब चोरी साबित होने के बाद भी एफआईआर नहीं होती, तो सवाल सिर्फ एक ठेकेदार पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर खड़े होते हैं। जनता अब जवाब चाहती है—क्या कानून सबके लिए बराबर है, या फिर रसूख के आगे कानून भी बेबस हो जाता है?

इससे पहले भी निर्माणाधीन नाली के बीचों-बीच खड़े बिजली के खंभे को हटाए बिना काम किए जाने पर बिजली विभाग ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। विभाग ने साफ कहा था कि चालू लाइन के बीच निर्माण होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और निगम को खंभा हटाने के लिए पत्र भी लिखा गया था। इसके बावजूद लापरवाही जारी रही।
अब सामने आए वीडियो में निर्माण कार्य के लिए सीधे ट्रांसफार्मर से बिजली चोरी करते हुए काम कराया जा रहा था। सड़क पर खुलेआम फैले बिजली के तार किसी भी राहगीर या स्थानीय नागरिक के लिए जानलेवा साबित हो सकते थे। सवाल यह है कि करोड़ों के सरकारी प्रोजेक्ट में बिजली का वैध कनेक्शन लेने के बजाय चोरी का रास्ता क्यों चुना गया?


सिरगिट्टी जोन के बिजली विभाग के अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए 77 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। विभाग के सब इंजीनियर ने स्पष्ट किया है कि जुर्माने के साथ-साथ भगवती कंस्ट्रक्शन के संचालक प्रशांत मिश्रा के खिलाफ सिरगिट्टी थाने में अपराध दर्ज कराने के लिए जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और बार बार सिरगिट्टी थाने के चक्कर लगाने के बाद भी fir नहीं हो पा रही है,बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि थाने में थाना प्रभारी से मुलाकात नहीं हो पा रही है और थाने में तैनात पुलिसकर्मियों थाना प्रभारी के आदेश पर ही एफआईआर दर्ज होने का हवाला देकर बिजली विभाग के अधिकारियों को उल्टे पांव बिना कार्यवाही के वापिस भेज देते है।
