


रायपुर। ई-20 ईंधन से जुड़ी एक अहम शिकायत पर रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसे वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने कहा कि यदि किसी ग्राहक को ऐसा वाहन बेचा जाता है जो ई-20 पेट्रोल के अनुरूप नहीं है और उसके कारण तकनीकी खराबी आती है, तो इसकी जिम्मेदारी निर्माता कंपनी और अधिकृत डीलर दोनों की होगी।
यह मामला रायपुर के एक चिकित्सक से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2024 में लगभग 20.50 लाख रुपये की एसयूवी खरीदी थी। कुछ महीनों तक वाहन सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन बाद में इंजन में बार-बार खराबी आने लगी। वाहन चलते समय अचानक बंद हो जाता था और कई बार सर्विस सेंटर ले जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
जांच के दौरान ईंधन टैंक में असामान्य पदार्थ मिलने के बाद सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से परीक्षण कराया गया। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि वाहन में उपयोग किया गया ईंधन ई-20 श्रेणी का था। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वाहन की तकनीक पुरानी थी, जिससे आयोग ने माना कि उपभोक्ता को पूरी जानकारी दिए बिना वाहन बेचना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।
आयोग ने अपने आदेश में कंपनी और डीलर को 45 दिनों के भीतर समान मॉडल की नई, ई-20 अनुकूल कार उपलब्ध कराने या ग्राहक को 20.50 लाख रुपये वापस करने का निर्देश दिया है।
वहीं, वाहन निर्माता कंपनी ने आयोग के फैसले से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि संबंधित मॉडल ई-20 ईंधन के लिए उपयुक्त था और इसकी जानकारी ओनर मैनुअल में पहले से दर्ज थी। कंपनी का यह भी दावा है कि वाहन में आई खराबी मिलावटी ईंधन के कारण हुई थी, न कि ई-20 पेट्रोल की वजह से। हालांकि आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अब कंपनी इस फैसले को उच्च स्तर पर चुनौती देने की तैयारी कर रही है।