डेस्क खबरबिलासपुर

वायरल VIDEO ने खोल दी पुलिस कार्रवाई की परतें!
डीजल चोर पकड़े गए… फिर थाने से कैसे छूट गए? VIDEO वायरल होते ही SSP का एक्शन, ASI सस्पेंड..!



डेस्क खबर बिलासपुर../ जिले की कोनी थाना पुलिस की डीजल चोरी के खिलाफ की गई कार्रवाई अब खुद जांच के घेरे में आ गई है। ट्रक और ट्रेलर से डीजल चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के खिलाफ कार्रवाई का दावा करने वाली पुलिस पर अब सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल VIDEO में पांच लोगों को हिरासत में लेते हुए दिखाया गया, लेकिन पुलिस ने केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी दिखाई। बाकी लोगों को थाने से छोड़ दिए जाने की जानकारी सामने आते ही मामला एसएसपी रजनेश सिंह तक पहुंचा और उन्होंने तत्काल प्रभाव से जांच अधिकारी ASI उमेश उपाध्याय को निलंबित कर दिया।
पुलिस के अनुसार 11 जुलाई को ट्रेलर से करीब 150 लीटर डीजल चोरी होने की शिकायत दर्ज हुई थी। जांच के दौरान सूचना मिलने पर पुलिस ने दो स्कॉर्पियो वाहनों में दबिश देकर करीब 200 लीटर चोरी का डीजल, पाइप और अन्य उपकरण जब्त किए। इस कार्रवाई में शिवप्रसाद उर्फ छोटू लोनिया और भानु प्रसाद लोनिया को गिरफ्तार करने का दावा किया गया, जबकि तीन आरोपियों के फरार होने की बात कही गई।


लेकिन कहानी तब बदल गई जब सोशल मीडिया पर वायरल VIDEO में बैसाखू लोनिया, राजू लोनिया, राजेश लोनिया समेत पांच लोगों को पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाते हुए देखा गया। अगले ही दिन इनमें से चार लोगों के थाने से छोड़े जाने की चर्चा शुरू हुई तो पुलिस की पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए। वायरल VIDEO के साथ लेन-देन के आरोप भी सोशल मीडिया पर लगाए गए, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है


मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि पांच लोगों को हिरासत में लेने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी जानकारी नहीं दी गई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए ASI उमेश उपाध्याय को तत्काल निलंबित कर दिया गया। साथ ही सीएसपी कोतवाली गगन कुमार को सात दिनों के भीतर पूरे मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल जो अभी बाकी हैं…


पुलिस ने जब पांच लोगों को पकड़ा था तो केवल दो की गिरफ्तारी क्यों दिखाई गई? बाकी लोगों को किस आधार पर छोड़ा गया? वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? अगर VIDEO वायरल नहीं होता, तो क्या यह मामला भी फाइलों में दब जाता? अब नजर इस बात पर है कि जांच केवल एक ASI के निलंबन तक सीमित रहती है या पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है।

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