


डेस्क खबर बिलासपुर../ फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले और कथित लू मुआवजा खेल की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब बिलासपुर में एक और सनसनीखेज मामला चर्चा का विषय बन गया है। इस बार सवाल आगजनी की घटना के बाद किए जा रहे कथित करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम पर उठ रहे हैं। आरोप है कि मामूली नुकसान को करोड़ों का नुकसान बताकर बीमा राशि हड़पने की पटकथा लिखी गई और अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा विधानसभा में उठाए गए फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल मचा दी थी। जांच में पुलिस ने अपराध दर्ज किया और करोड़ों रुपये के कथित फर्जी मुआवजे के खेल का खुलासा हुआ। आरोपों के मुताबिक डॉक्टर, पुलिसकर्मी, पोस्टमार्टम कर्मचारी, वकील और अन्य विभागों के लोगों का एक सिंडिकेट बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

इसी बीच अब तोरवा क्षेत्र की एक आगजनी घटना ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि 4 जून की रात को बुधवारी बाजार में आगजनी की घटना में एक गोदाम सहित तीन दुकानें जलकर खाक हो गई । इनमें डाली ड्रेस का गोदाम, जय हिंद साइकिल और जय हिंद इंटरप्राइजेज शामिल थे। आग बुझने के बाद मामला सामान्य माना जा रहा था, लेकिन अब आरोप है कि इसी घटना को करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम में बदलने की कोशिश की जा रही है।

जय हिंद साइकिल के संचालक सुरेंद्र सिंह अजमानी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस स्थान पर आग लगी थी वह डाली ड्रेस का गोदाम था और वहां सीमित मात्रा में कपड़ा रखा हुआ था। उनका दावा है कि वास्तविक नुकसान एक-दो लाख रुपये से ज्यादा नहीं था, लेकिन करोड़ों रुपये का क्लेम लेने की तैयारी चल रही है।
आखिर नुकसान कितना हुआ?
यहीं से कहानी और दिलचस्प हो जाती है।
सूत्रों के अनुसार आगजनी के तुरंत बाद नुकसान की राशि कुछ लाख रुपये बताई गई। बाद में पुलिस को दिए गए आवेदन में कथित तौर पर करीब ढाई करोड़ रुपये के नुकसान का उल्लेख किया गया। इसके बाद शिकायत सामने आने पर नुकसान का आंकड़ा घटकर एक करोड़ 25 लाख रुपये तक पहुंच गया।

अब सवाल यह है कि आखिर कुछ दिनों के भीतर नुकसान का आंकड़ा लाखों से करोड़ों और फिर करोड़ों से कम करोड़ तक कैसे पहुंच गया?
गोदाम या दुकान?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आग जिस स्थान पर लगी वह गोदाम था, लेकिन बीमा क्लेम को मजबूत करने के लिए उसे दुकान के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई। यहां तक आरोप लगाए जा रहे हैं कि आग के बाद मूल दुकान का नाम बोर्ड हटाकर उसे दूसरी जगह लगाने की तैयारी की गई, ताकि नुकसान को बड़ा दिखाया जा सके।
यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल बीमा क्लेम का मामला नहीं बल्कि सुनियोजित आर्थिक धोखाधड़ी का मामला बन सकता है। और ऐसे में यदि शिकायतकर्ता के आरोप सच साबित होते है तो तोरवा पुलिस थाना में डाली ड्रेसेज द्वारा आगजनी की घटना से करोड़ों रु के नुक़सान के क्लेम के लिए पुलिस वेरिफिकेशन दिए गए झूठे दस्तावेज के आधार पर डाली ड्रेसेज संचालक के खिलाफ अपराध दर्ज होना चाहिए ।
पुलिस की चुप्पी क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल पुलिस की भूमिका पर उठ रहे हैं। शिकायत दिए जाने के बाद भी अब तक कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। मीडिया द्वारा जानकारी लेने की कोशिशों पर भी जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कुछ बोलने से बचते नजर आ रहे हैं और ना ही करोड़ो के क्लेम और शिकायकर्ता के आरोप पर कुछ भी बताने से इंकार कर रहे है।
उधर डाली ड्रेस के संचालक की भूमिका भी इसलिए संदिग्ध हो जाती है क्योंकि इस बारे में मिडीया से इस मामले में थाने से जानकारी लेने की बात कह कर फोन पर भी बात नहीं करना चाहते है। यानी पुलिस और दुकान संचालक इस मामले में कुछ छुपाने की कोशिश करते नजर आ रहे है।
शहर में चर्चा, जांच की मांग तेज
सर्पदंश घोटाले में करोड़ों रुपये के फर्जी मुआवजे की जांच और लू मुआवजे के मामलों पर उठे सवालों के बीच अब आगजनी क्लेम विवाद ने नया मोर्चा खोल दिया है। बुधवारी व्यापारी संघ के इस फर्जी क्लेम को लेकर चल रही चर्चा गहमा गहमी का विषय बनी हुई है, चर्चा है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो बीमा क्लेम के नाम पर बड़े आर्थिक खेल का सच कभी सामने नहीं आ पाएगा।
अब निगाहें पुलिस और जांच एजेंसियों पर हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि आग में कितना नुकसान हुआ, बल्कि यह भी है कि कहीं आपदा को अवसर बनाकर करोड़ों रुपये के क्लेम की कोई नई पटकथा तो नहीं लिखी जा रही?
फिलहाल आरोप गंभीर हैं, दस्तावेजों में विरोधाभास बताए जा रहे हैं और दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे में सच क्या है, इसका जवाब मीडिया के तीखे सवालों पर पुलिस और दुकान संचालक ही बेहतर दे पायेगे ।
जल्द ही इस मामले के अगले अंकों में पुख्ता दस्तावेजों और दुकान संचालक द्वारा आगजनी की घटना के दिन मीडिया में दिए गए बयान सहित पूरे खेल का खुलासा ??