


डेस्क खबर बिलासपुर../जिले के कई स्कूल जो सीबीएसई मान्यता प्राप्त है। अपने संस्था के नाम का फायदा उठाते हुए अन्य स्थानों पर उसी स्कूल के नाम पर क्रमांक (2) लिखकर सीजी मान्यता प्राप्त स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न मान्यता प्राप्त बताकर संचालित करते आ रहे है। शासन के आदेश विपरीत किसी विशेष संस्थान से कापी किताब और ड्रेस खरीदने को आज भी मजबूर कर रहे है एैसे स्कूल संस्थानों पर लगातार कार्यवाही जारी रहेगी। ताज़ा मामला राजेंद्र नगर स्थित महर्षि विद्या मंदिर (||) का है।

महर्षि विद्या मंदिर स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को सीबीएसई मान्यता प्राप्त बताकर बच्चों का ऐडमिशन करवा लेते है।बाद में मार्क शीट सीजी बोर्ड का दे रहे है। कई वर्षों से महर्षि विद्या मंदिर का फर्जीवाड़ा जारी था कि स्कूल प्रबंधन की कूटनीति का भेद तब खुल गया जब इमिलपारा निवासी विवेक लक्ष्में ने अपने बच्चों के टीसी नही देने से व्यस्थित होकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सीएम हेल्प लाइन नंबर में शिकायत दर्ज करा दी।

दरअसल पिछले वर्ष इमलिपारा निवासी विवेक लक्ष्में ने अपनी बेटियों का महर्षि विद्या मंदिर राजेंद्र नगर में कक्षा नर्सरी और कक्षा छठवीं में ऐडमिशन कराया। बड़ी बेटी पहले से वहां पढ़ाई कर रही थी। अचानक उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उनके दोनों बच्चों को स्कूल प्रबंधन ने वार्षिक परीक्षा से वंचित कर दिया। जिसके बाद वर्तमान वर्ष में विवेक लक्ष्में ने अपने बेटियों को दिगर स्कूल में प्रवेश कराने के लिए महर्षि विद्या मंदिर के प्रचार्य से टीसी मांगा तो प्रबंधन के द्वारा बकाया फीस पटाने के बाद ही टीसी देने कहा गया। शिकायतकर्ता ने प्राचार्य से किस्त में फीस देने का निवेदन भी किया लेकिन प्रबंधन ने एक साथ बकाया फीस पटाने के बाद ही टीसी देने की बात कही। अंत में थक हारकर पत्रकार ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन के साथ -साथ सीएम हेल्पलाइन में आज शिकायत दर्ज कराई। तत्पश्चात मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च आदेश के बाद एबीओ मुकेश अग्रवाल ने शिकायतकर्ता से तत्काल बातचीत की तो शिकायतकर्ता को पता चला कि महर्षि विद्या मंदिर राजेंद्र नगर सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल नही है। पीड़ित के द्वारा अधिकारियों को बताया कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल बताकर उनके बच्चों को प्रवेश दिया था।

विशेष दुकान से कॉपी किताब और ड्रेस की खरीदी
बता दे कि हाल ही में शासन ने सख़्त आदेश दिया था कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान संस्थान से कॉपी किताब और ड्रेस खरीदने मज़बूर नहीं करें। जिसके बाद भी महर्षि स्कूल प्रबंधन विशेष दुकान संस्थान से कॉपी किताब और ड्रेस खरीदने अभिभावकों को मजबूर करती है।