कर्रा जनसुनवाई में बड़ा खुलासा! एक दिन पहले तक नहीं थी ग्रामीणों को जानकारी, पैसों के दम पर समर्थन का आरोप – NGT जाने की तैयारी
मजदूरों को नोट बाटा और और और अपने पक्ष मे करवाया जनसमर्थन-रेवा शंकर
नोटिस गायब, समर्थन तैयार! जनसुनवाई या मैनेजमेंट? कर्रा में उठे बड़े सवाल,
कई कांग्रेसी समर्थन में, भाजपा विरोध पर! कर्रा वाशरी विस्तार पर सियासी संग्राम
1 बजे तक चली जनसुनवाई – कांग्रेस समर्थन में, भाजपा विरोध में; अब कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी



डेस्क खबर बिलासपुर../ मस्तूरी तहसील के ग्राम कर्रा-गतौरा क्षेत्र में हिन्द एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड की कोल वाशरी विस्तार को लेकर आयोजित जनसुनवाई बुधवार को दोपहर लगभग 1 बजे भारी हंगामे और विरोध के बीच समाप्त हो गई। जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने प्रदूषण, जल संकट और प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
NGT में जाने का ऐलान, कानूनी लड़ाई तेज विरोध कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने पैसों के दम पर समर्थन कराया गया। इस आरोप के बाद माहौल और गरमा गया और विरोध तेज हो गया।और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने घोषणा की है कि वे इस मामले को अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाएंगे। उनका कहना है कि जनसुनवाई की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और नियमों का उल्लंघन हुआ है।
सियासी टकराव – कांग्रेस बनाम भाजपा
कांग्रेस ने परियोजना को विकास और रोजगार से जोड़ते हुए समर्थन किया
भाजपा ने “गुपचुप जनसुनवाई” बताते हुए खुलकर विरोध किया
प्रदूषण और जल संकट पर फूटा गुस्सा
जनसुनवाई में ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए—
कोयले की धूल से फैलता वायु प्रदूषण,अरपा नदी में केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने का आरोप,
भूजल स्तर में भारी गिरावट,
खेतों की उपजाऊ क्षमता खत्म,
जे.के. कॉलेज और रेलवे स्टेशन भी प्रभावित,कोयले की काली धूल का असर शैक्षणिक संस्थानों और रेलवे स्टेशन तक पहुंच गया है, जिससे छात्रों, यात्रियों और कर्मचारियों को परेशानी हो रही है।
*कानूनी उल्लंघन के गंभीर आरोप*
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सही पाए गए तो कंपनी पर कई सख्त कानून लागू हो सकते हैं:
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986: नियमों के उल्लंघन पर प्लांट बंद और भारी जुर्माना
EIA नोटिफिकेशन 2006: बिना वैध नोटिस जनसुनवाई अवैध घोषित हो सकती है
जल अधिनियम 1974: बिना ट्रीटमेंट प्रदूषित पानी छोड़ना दंडनीय अपराध
वायु अधिनियम 1981: कोयला धूल से प्रदूषण फैलाना अपराध की श्रेणी में
भूजल नियम (CGWA): बिना अनुमति भारी मोटरों से पानी निकालना गैरकानूनी
*NGT की सख्ती का खतरा*
यदि मामला NGT पहुंचता है, तो—
परियोजना पर रोक लग सकती है
करोड़ों का पर्यावरण मुआवजा लगाया जा सकता है
जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी पर कार्रवाई संभव है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजर अंदाज किया गया, तो वे सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेंगे।
कर्रा की जनसुनवाई खत्म जरूर हो गई है, लेकिन जिस तरह से सूचना छुपाने और पैसों के दम पर समर्थन के आरोप लगे हैं, उसने पूरे मामले को और ज्यादा विवादित बना दिया है। अब यह मुद्दा सीधे NGT और जन आंदोलन की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।
*दलालो के दम बिना क्षेत्र वासियो को नोटिस प्रचार प्रसार के करवाया गया जनसुनवाई*
पर्यावरण हितैषी एवं क्षेत्र के तेज तर्रार जनपद सदस्य रेवा शंकर साहू का कहना है, ये जन सुनवाई जनताओं को लेकर नहीं नोटों के दम पर जिला प्रशासन द्वारा सेठ बनिया को खुश करने के उद्देश्य से किया गया है,ना कोई क्षेत्र मे उक्त जनसुनवाई का प्रचार प्रसार किया गया और ना ही जनजांगरण किया गया लेकिन हम इसका घोर विरोध करते है जरूरत पड़ी तो जैसे एनटीपीसी के भ्रष्ट दलाल वासने के खिलाफ आंदोलन कर रहे वैसे ही हिन्द इनर्जी के खिलाफ आंदोलन करेंगे जरुरत पड़ने पर ग्रीन ट्यूबनल भी जाऐंगे!