


डेस्क खबर बिलासपुर। कुरदर से उमरिया सरगोड़ तक बन रही 8 करोड़ 41 लाख 60 हजार रुपये की सड़क अब सिर्फ निर्माण कार्य नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल बनकर खड़ी हो गई है। ग्राउंड स्थल से जो तस्वीर निकल कर सामने आई है, वह सिर्फ निर्माण कार्य की खामियां नहीं दिखाती, बल्कि यह भी पूछती है कि आखिर करोड़ों रुपये के काम में जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार किसकी निगरानी में काम कर रहे हैं? मीडिया निरीक्षण में निर्माण स्थल पर न इंजीनियर मिला, न सुपरवाइजर और न ही ठेकेदार का कोई प्रतिनिधि। सवाल यह है कि अगर करोड़ों रुपये का सरकारी काम बिना निगरानी के चल रहा है तो क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर सब कुछ “जानकारी में” होने के बावजूद अनदेखा किया जा रहा है?
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए वीडियो में सड़क पर गिट्टी का छिड़काव दिखाई देता है, लेकिन रोलर और कंपैक्शन के स्पष्ट प्रमाण नजर नहीं आते। नई बनी पुलिया का हिस्सा हाथ लगाने पर टूटता दिखाई देता है। ऐसे दृश्य देखकर आम आदमी का पहला सवाल यही होता है कि यदि काम मानकों के अनुरूप है तो फिर गुणवत्ता जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रही?
सबसे बड़ा प्रश्न प्रशासनिक जवाबदेही का है। किसी भी निर्माण कार्य में ठेकेदार अकेले काम नहीं करता। उसके ऊपर विभागीय इंजीनियर, उप अभियंता, गुणवत्ता नियंत्रण इकाई और वरिष्ठ अधिकारी होते हैं। यदि काम में कथित खामियां दिखाई दे रही हैं तो फिर निरीक्षण रिपोर्ट में सब कुछ ठीक कैसे लिखा जा रहा है? क्या निरीक्षण केवल फाइलों तक सीमित है या वास्तव में अधिकारी मौके पर जाकर काम देख रहे हैं?
ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिनों से साइट पर कोई जिम्मेदार अधिकारी दिखाई नहीं देता। यदि यह सच है तो यह केवल निर्माण एजेंसी की विफलता नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की भी गंभीर असफलता मानी जाएगी। क्योंकि सरकारी योजनाओं में भुगतान से पहले गुणवत्ता परीक्षण और भौतिक सत्यापन की व्यवस्था होती है।

यह मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं है। यह उस भरोसे का मामला है जिसके आधार पर सरकार गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है। यदि जमीन पर गुणवत्ता और निगरानी दोनों गायब हैं, तो फिर सवाल सिर्फ ठेकेदार पर नहीं, पूरे प्रशासनिक ढांचे पर खड़ा होता है।
जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन, संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य स्तर की गुणवत्ता जांच एजेंसियां तत्काल मौके पर पहुंचकर तकनीकी परीक्षण कराएं। यदि सब कुछ मानक के अनुरूप है तो जनता के सामने तथ्य रखें और यदि अनियमितता मिली है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी पर कठोर कार्रवाई हो। क्योंकि जनता का पैसा विकास के लिए होता है, समझौते के लिए नहीं। और जब करोड़ों रुपये खर्च हों, तो जवाबदेही भी करोड़ों रुपये जितनी ही बड़ी होनी चाहिए। वही इन तस्वीरों में भ्रष्टाचार और घटिया काम साफ़ साफ नजर आ रहा उसके बाद भी विभाग के अधिकारी सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे है। अब उम्मीद है कि जिले में बैठे उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचकर किए जाए कार्यों की गुणवत्ता का निरीक्षण करेंगे और करोड़ों रु के हो रहे घटिया कामों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही करेंगे। भ्रष्टाचार की इस सड़क के चौंकाने वाले और भी खुलासे अगले अंक में !!