डेस्क खबरबिलासपुर

गैस से लेकर सरकारी राशन की हेराफेरी ,शिकायतों के बाद भी नहीं मिल रहा इंसाफ़.! खाद्य विभाग की मानिटरिंग पर उठे गंभीर सवाल ??



डेस्क खबर बिलासपुर ../ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर जिले में गैस से लेकर सरकारी चावल की जमकर कालाबाजारी,हेराफेरी और मुनाफाखोरी  तफरी चल रही है।खाद्य विभाग के अधीन आने वाले जनहित और जरूरतमंद आपूर्ति वाले विभाग में लगातार पेट्रोल ,डीजल,गैस,चावल से जुड़े मामले में कुछ संचालकों द्वारा जमकर अफरा तफरी की जा रही है।पुख्ता प्रमाणित खबरों और शिकायतों के बाद भी खाद्य विभाग आँख मूंदे बैठा हुआ है। ताजा मामला तारबहार थाना क्षेत्र स्थित विनोद गैस एजेंसी द्वारा किए गए गैस घोटाले से जुड़ा हुआ है जहां एजेंसी द्वारा बिना सिलेंडर पहुंचाये फर्जी तरीके से उपभोक्ता के नाम पर दिखाकर बड़ा खेल कर दिया । शिकायकर्ता मनीष मिश्रा के अनुसार उनकी बुकिंग आईडी से फर्जी तरीके से अलग अलग तारीख में करीब 10 बार सप्लाई की जा चुकी है जबकि कार्ड में सिर्फ 3 बार की ही डिलीवरी दर्ज है। जनहित और सरकार से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग से जुड़े इस गंभीर मामले में बिलासपुर से लेकर बाम्बे दफ्तर तक दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने की गुहार लगाई लेकिन जब उपभोक्ता को इंसाफ नहीं मिला तो गैस एजेंसी के खिलाफ तारबहार थाने में अपराध दर्ज करवाया है। प्रार्थी मनीष मिश्रा ने पूरे मामले और रिकार्ड की तकनीकी जांच और कालाबाजारी के खेल में शामिल जिम्मेदार अधिकारी और एजेंसी प्रबंधन सहित गैरकानूनी रूप से कालाबाजारी के माध्यम से लिए गए उनके नाम पर सिलेंडर लेने वाले की पहचान कर सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है ।




गौरतलब है कि खाद्य विभाग से जुड़े इस गंभीर मामले ने पूरे निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के हजारों हितग्राहियों तक पहुंचने वाले राशन की व्यवस्था में जिस तरह की अनियमितताओं की चर्चा सामने आ रही है, वह बेहद चिंताजनक है। सवाल यह है कि जब परिवहन से लेकर वितरण तक पूरी व्यवस्था ऑनलाइन, जीपीएस आधारित और तकनीकी निगरानी में होने का दावा किया जाता है, तब भी कथित रूप से फर्जी डिलीवरी, चावल की हेराफेरी और कालाबाजारी जैसे खेल कैसे संचालित हो रहे हैं? विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो कुछ चुनिंदा गोदामों में सरकारी चावल उतारकर दूसरी बोरियों में भरने और उसे राइस मिलों तक पहुंचाने का संगठित नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है, जो जीपीएस को माध्यम बनाकर सिलेंडर घेरलू गैस की तरह सरकारी चावल की फजी डिलेवरी शासकीय उचित मूल्यों की दुकानों पर खाली करने दावा कर चावल की जमकर हेराफेरी कर रहे है कर सरकारी चावल पर मुनाफाखोरी कर मालामाल हो रहे है। बताया जा रहा है कि इस बड़े खेल में चुनिंदा दुकानदार भी शामिल है जो कई बार कैमरे में राशन के बदले नगद पैसा देते हुए कैद हो चुके है

और उनके खिलाफ की गई  विभागीय कार्यवाही में भी आरोप प्रमाणित हो चुके है।  इतना ही नहीं, कई सरकारी राशन दुकानों के किराए पर संचालित होने और कुछ लोगों द्वारा एक से अधिक दुकानों के संचालन की चर्चाएं भी आम हैं। हालांकि ऐसे सौदे अक्सर मौखिक होने के कारण दस्तावेजी प्रमाण जुटाना कठिन होता है, लेकिन इनकी चर्चा वर्षों से खुलेआम होती रही है। और फिर सरकार द्वारा गरीबों को दिया जाने वाला चावल गाड़ियों में भरकर जिले सहित आसपास मौजूद कई राइस मिलो पर खपा दिया जाता है ।सबसे बड़ा सवाल खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर है, जो शिकायतों और सूचनाओं के बावजूद कार्रवाई के बजाय मूकदर्शक नजर आता है। यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह सिर्फ राशन या गैस वितरण की गड़बड़ी नहीं, बल्कि गरीबों के हक पर डाका और सरकारी निगरानी व्यवस्था की बड़ी विफलता है। अब जरूरत केवल जांच की नहीं, बल्कि पूरे वितरण तंत्र के स्वतंत्र ऑडिट और जवाबदेही तय करने की है, ताकि कालाबाजारी और भ्रष्टाचार के इस कथित खेल पर लगाम लगाई और आम लोगों से जुड़े इन मुद्दों की कार्यप्रणाली,पारदर्शिता और मानिटरिंग सिस्टम की विश्वनीयता पर कोई सवाल खड़े न कर सके .?

error: Content is protected !!