डेस्क खबर

कीचड़ में कैद बचपन, कागजों में विकास!  विष्णु सरकार और  बिलासपुर प्रशासन के दावों की खुली  पोल..कोटा विधानसभा के कंचनपुर से आई बदहाल तस्वीर से उठे सवाल .??




डेस्क खबर बिलासपुर../ एक तरफ सरकार बेहतर शिक्षा, सुशासन और गांव-गांव विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, दूसरी तरफ बिलासपुर जिले के कोटा विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचनपुर की तस्वीर इन दावों की परतें उधेड़ रही है। यहां स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे किताबों के साथ कीचड़ से जंग लड़ रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अफसर और जनप्रतिनिधि सिर्फ कागजी विकास का ढोल पीट रहे हैं।
गांव का वह मुख्य मार्ग, जिससे दो प्राथमिक स्कूल और एक आंगनबाड़ी केंद्र जुड़े हैं, पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका है। हालात इतने बदतर हैं कि बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना किसी परीक्षा से कम नहीं। हर दिन फिसलना, गिरना, कपड़े और किताबें खराब होना अब उनकी दिनचर्या बन गई है।


विडंबना देखिए… सरकार शिक्षा के अधिकार और 100 प्रतिशत नामांकन की बात करती है, लेकिन यहां बच्चों को स्कूल पहुंचने का अधिकार तक नहीं मिल पा रहा। सवाल उठता है कि जब रास्ता ही नहीं है तो शिक्षा के बड़े-बड़े दावे किसके लिए हैं?
मामला सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के एक गंभीर मरीज को एंबुलेंस तक कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा, क्योंकि एंबुलेंस कीचड़ भरे रास्ते से गांव के भीतर नहीं पहुंच सकी। अगर उस दिन कोई अनहोनी हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?


ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद सरपंच प्रेमलता अरविंद और पंचायत प्रशासन ने समस्या का समाधान नहीं किया। विकास कार्यों के लिए लाखों रुपये आने के बावजूद सड़क की यह हालत कई गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है ।कंचनपुर की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां भाषणों में विकास दौड़ता है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कीचड़ में फंसी हुई है। अब फैसला प्रशासन को करना है—दलदल हटेगा या फिर विकास के दावे इसी कीचड़ में हमेशा के लिए धंसते रहेंगे


कंचनपुर की तस्वीर साफ संदेश दे रही है कि जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में बहुत बड़ा अंतर है। यदि जिम्मेदार विभागों ने तत्काल सड़क निर्माण, जांच और जवाबदेही तय नहीं की, तो यह मामला सिर्फ एक पंचायत की लापरवाही नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विफलता का प्रतीक बन जाएगा।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं कराया गया तो वे जनपद पंचायत और जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब निगाहें जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और शिक्षा विभाग पर हैं। देखना होगा कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारी तत्काल कार्रवाई करते हैं या फिर कंचनपुर के बच्चे आने वाले दिनों में भी कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर रहेंगे।

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