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विभाग पर लगे आरोपों का जिला शिक्षा अधिकारी ने किया खंडन, कहा- भ्रामक खबरों से विभाग की छवि खराब करने की कोशिश..प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी सफाई.!




बलरामपुर/रामानुजगंज। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बलरामपुर-रामानुजगंज ने हाल ही में कुछ समाचार पत्रों और मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित खबरों का खंडन करते हुए विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रकाशित समाचार भ्रामक, तथ्यहीन और वास्तविक परिस्थितियों से परे हैं। विभाग का कहना है कि बिना पर्याप्त तथ्यों और आधिकारिक पुष्टि के लगाए गए आरोपों से न केवल अधिकारियों की छवि प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता के बीच भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।
कलेक्टर के नाम से आदेश जारी करने के आरोप को बताया निराधार
प्रेस विज्ञप्ति में सबसे पहले उस आरोप का जवाब दिया गया है जिसमें कहा गया था कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कलेक्टर कार्यालय के नाम से आदेश जारी किए जा रहे हैं। इस संबंध में डीईओ कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि विभागीय कार्यों के दौरान कई प्रकार के प्रस्ताव, पत्राचार और नोटशीट तैयार की जाती हैं, जिन्हें आवश्यकतानुसार कलेक्टर कार्यालय को भेजा जाता है।


विभाग के अनुसार एक पत्र में टंकण या लिपिकीय त्रुटि के कारण “कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, बलरामपुर-रामानुजगंज” के स्थान पर “कार्यालय कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज” अंकित हो गया था। इसे जानबूझकर जारी आदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। विभाग का कहना है कि एक सामान्य प्रशासनिक त्रुटि को अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बनाया गया।
कार्यालय संचालन में बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों का भी खंडन
कुछ समाचारों में यह भी दावा किया गया था कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कर्मचारियों के साथ समन्वय की कमी है और बाहरी व्यक्तियों के माध्यम से कार्य कराए जा रहे हैं। इस आरोप पर विभाग ने कड़ी आपत्ति जताई है।


प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कार्यालय के सभी कार्य शासन द्वारा निर्धारित नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत संचालित किए जाते हैं। कार्यालयीन कार्यों का निष्पादन नियमित कर्मचारियों और अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से ही किया जाता है। किसी भी बाहरी व्यक्ति को विभागीय कार्यों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं है। विभाग ने ऐसे आरोपों को पूरी तरह आधारहीन और तथ्यविहीन बताया है।
दस्तावेज निजी निवास ले जाने के आरोप को बताया गलत
समाचारों में यह भी आरोप लगाया गया था कि विद्यालयों से प्राप्त महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अभिलेखों को निजी निवास पर ले जाया जाता है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इस आरोप को भी पूरी तरह गलत बताया है।
विभाग के अनुसार सभी महत्वपूर्ण अभिलेख निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्यालय में सुरक्षित रखे जाते हैं। दस्तावेजों का संधारण और संरक्षण कार्यालय परिसर में ही किया जाता है तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित शाखाओं और अधिकारियों को उपलब्ध कराया जाता है। विभाग ने कहा कि रिकॉर्ड प्रबंधन से संबंधित सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप संचालित होती हैं और निजी स्तर पर दस्तावेज रखने का आरोप निराधार है।


आरटीआई मामलों में लापरवाही के आरोपों पर दी सफाई
प्रेस विज्ञप्ति में सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) से जुड़े मामलों पर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। कुछ समाचारों में दावा किया गया था कि विभाग में सैकड़ों आरटीआई आवेदन लंबित हैं और उनके निराकरण में लापरवाही बरती जा रही है।
इस पर विभाग ने कहा कि प्राप्त होने वाले सभी आरटीआई आवेदनों का निराकरण नियमानुसार और निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाता है। हालांकि कुछ मामलों में जानकारी संकलित करने, संबंधित शाखाओं से जानकारी प्राप्त करने या प्रशासनिक कारणों से थोड़ी देरी हो सकती है। लेकिन इसे लापरवाही कहना उचित नहीं होगा। विभाग का दावा है कि सभी प्रकरणों का निराकरण विधिसम्मत तरीके से किया जाता है।
‘सूत्रों’ के हवाले से लगाए गए आरोपों पर सवाल
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने यह भी कहा है कि कई आरोप विभागीय सूत्रों के हवाले से लगाए गए हैं, लेकिन उनके समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण या आधिकारिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। विभाग का मानना है कि बिना पुष्टि के प्रकाशित समाचार प्रशासनिक व्यवस्था पर अनावश्यक सवाल खड़े करते हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस प्रकार की खबरें विभाग और अधिकारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हैं। साथ ही इससे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित होता है।
जनता से अपील, तथ्यात्मक जानकारी के लिए कार्यालय से करें संपर्क
जिला शिक्षा अधिकारी ने आम नागरिकों, अभिभावकों और पाठकों से अपील की है कि वे अपुष्ट और एकपक्षीय खबरों पर विश्वास न करें। किसी भी विषय में सही और तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करने के लिए सीधे विभागीय कार्यालय से संपर्क करें।
विभाग ने कहा है कि उसकी सभी गतिविधियां शासन के निर्देशों, प्रचलित नियमों और प्रशासनिक पारदर्शिता के अनुरूप संचालित की जा रही हैं। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों के हित में कार्य करना विभाग की प्राथमिकता है।
विभाग ने निष्पक्ष पत्रकारिता की भी अपेक्षा जताई
प्रेस विज्ञप्ति के अंत में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने मीडिया संस्थानों से भी अपेक्षा जताई है कि किसी भी समाचार के प्रकाशन से पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक पक्ष अवश्य लिया जाए। विभाग का मानना है कि संतुलित और तथ्यात्मक पत्रकारिता से ही जनता तक सही जानकारी पहुंच सकती है।
डीईओ कार्यालय ने एक बार फिर दोहराया है कि प्रकाशित समाचारों में लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और विभाग उन्हें पूर्णतः भ्रामक मानते हुए खारिज करता है। साथ ही भविष्य में भी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है।

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