डेस्क खबरबिलासपुर

बिलासपुर में सरकारी चावल का चल रहा बड़ा खेल , एफसीआई गोदाम से लेकर राशन दुकानों में हो रही हेराफेरी ! दुकानों के बदले गोदामों में खाली हो रही सरकारी राशन की गाड़ी, वीडियो वायरल होने के बाद भी नहीं हो रही कार्यवाही .??



डेस्क खबर बिलासपुर ../ न्यायधानी बिलासपुर में खुलेआम गरीबों को मुफ्त और सस्ता सरकारी चावल की हेराफेरी कालाबाजारी,मुनाफाखोरी और चोरी की जा रही है उसके बाद भी जिले में तैनातजिम्मेदार विभाग औरअधिकारी आँख मूंदे  बैठे हुए नजर आ रहे है। लगातार राशन दुकानों से चावल के बदले नगद पैसा देते हुए कई पुख्ता वीडियो तस्वीर सामने आने के बाद भी चावल चोरों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं होने से इनके हौसले बुलंद होते जा रहे है और प्रदेश में सुशासन के दावे करने वाली सरकार को को मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे है जिसके चलते गरीबों और जरूरतमंदों को दिए जाने वाले चावल की जमकर मार्केट में कालाबाजारी हो रही है। एफसीआई गोदाम से सरकारी चावल हेराफेरी,चोरी का वीडियो वायरल होने  के आरोपों पर 12 दिन से सन्नाटा पसरा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार चावल के इस गोरखधंधे के पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है सूत्रों की माने तो एफसीआई गोदाम से सरकारी राशन दुकानों के लिए गरीबों की भूख शांत करने वाला सरकारी चावल की गाड़ियों में जीपीएस के माध्यम से कुछ रसूखदार बड़ा खेल खेल कर जमकर सरकारी योजना में मुनाफाखोरी कर रहे है।नाम न छापने की शर्त में एक दुकानदार का दावा है कि चावल से भरी गाड़िया सरकारी दुकानों में खाली न होकर कुछ निश्चित क्षेत्रों में बने गोदामों में खाली कर दी जाती है और गोदामों के अंदर चावल को सरकारी बोरी से निकालकर दूसरी बोरियो में भरकर बड़ी बड़ी गाड़ियों में भरकर बिल्हा,रतनपुर,तखतपुर सहित बिलासपुर के आसपास स्थित जिलो की राइस मिलो में खपा दिया जाता है सूत्र का दावा है कि जीपीएस ट्रैक न हो इसलिए सरकारी चावल से लदी इन गाड़ियों को सरकारी दुकानों के आसपास घुमाकर वापिस भेज दिया जाता है । चावल के इस बड़े खेल में चावल चोर मालामाल हो रहे है और यही चावल बाजारों में पतला और मिलावट कर महंगे दामों में आम जनता खाने की मजबूर हो रही है।




एक ओर जहाँ प्रदेश और जिले की ट्रिपल इंजन  सरकार सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का दावा कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ वहीं बिलासपुर के तारबाहर स्थित एफसीआई गोदाम से सामने आए एक मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गोदाम परिसर के भीतर शासकीय चावल की कथित हेराफेरी करते हुए एक ट्रक को रंगे हाथ पकड़ा गया, लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद भी न एफआईआर दर्ज हुई और न ही पुलिस को सूचना दी गई।
मीडिया संस्थानों में प्रसारित खबरों और सूत्रों के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद संबंधित ट्रक मालिक ने माफी मांग ली और इसके बाद पूरे प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गोदाम से जुड़े कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों और  प्रभावशाली ठेकेदारो के संरक्षण के कारण मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। बताया यह भी जा रहा है कि शहर में एक निश्चित रसूखदार व्यापारी द्वारा सरकारी राशन दुकानों में मिलने वाला चावल  50 फीसदी से ज्यादा अकेले कालाबाजारी कर जमकर मुनाफाखोरी की जा रही है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शासकीय खाद्यान्न की हेराफेरी का मामला पकड़ में आया था तो नियमानुसार तत्काल पुलिस को सूचना देकर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई? आखिर किसके संरक्षण में इतनी बड़ी लापरवाही हुई?
मामले को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसके बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वीडियो पूरे घटनाक्रम की कहानी बयां कर रहा है।


सवाल पूछते ही कट गया फोन!
जब मामले की जानकारी के लिए गोदाम प्रभारी अनूप कुमार से संपर्क किया गया तो कथित तौर पर फोन कट गया। इसके बाद दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन जवाब नहीं मिला। वहीं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, मगर उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।


कई सवालों के जवाब बाकी
क्या एफसीआई गोदाम में वास्तव में चावल हेराफेरी का मामला पकड़ा गया था?
यदि हां, तो अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई?
पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई?
क्या किसी प्रभावशाली सिंडिकेट के दबाव में कार्रवाई रोकी गई?
आखिर जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
अब देखना होगा कि वायरल वीडियो और लगातार उठ रहे सवालों के बाद प्रशासन और एफसीआई प्रबंधन इस मामले में जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर यह मामला चुनिंदा चावल चोरों के अध्यक्ष के खिलाफ तत्कालीन खाद्य नियंत्रक द्वारा विभागीय जांच रिपोर्ट की तरह यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। हालांकि इस मामले की जानकारी लेने के लिए इस बार खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर को इसलिए फोन नहीं लगाया गया क्योंकि वे कभी फोन रिसीव करने की जरूरत महसूस नहीं करते है ।उम्मीद की जा रही सरकार की छबि खराब करने वाली आ रही इन खबरों में अब जिम्मेदार पब्लिक सर्वेंट अधिकारी संज्ञान लेंगे और चावल चोरों के चेहरो को बेनकाब करेंगे।

error: Content is protected !!