

डेस्क खबर बिलासपुर ../ जिले की धार्मिक नगरी रतनपुर के कृष्णार्जुनी तालाब से कथित रूप से मछली निकालने के मामले में भाजपा पार्षद इंदु यादव और दीपक विजय के खिलाफ मछुआरा समिति द्वारा रतनपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है और शिकायत में लीज पर संचालित तालाब में बिना अनुमति प्रवेश कर मछली निकालने का आरोप लगाया गया है, जिससे समिति ने आर्थिक नुकसान होने का दावा किया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी आम व्यक्ति पर लीजधारी की संपत्ति या अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का आरोप लगता, तो क्या पुलिस इतनी ही देर लगाती? या फिर तत्काल अपराध दर्ज कर कार्रवाई शुरू हो जाती?
मछुआरा समिति का आरोप है कि वर्षों से लीज पर संचालित तालाब में बिना अनुमति हस्तक्षेप किया गया। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल मछली निकालने का मामला नहीं बल्कि लीजधारी संस्था के अधिकारों को चुनौती देने का मामला भी माना जाएगा।

क्षेत्र में चर्चा इस बात की भी है कि क्या जनप्रतिनिधि होने का प्रभाव कार्रवाई की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन शिकायत के बाद तत्काल कार्रवाई नहीं होने से सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। वहीं पूरे आरोपों पर बीजेपी पार्षद का कहना है कि उन्होंने गंदगी होने पर तालब में जाल डालकर सफाई की थी हालांकि मछली कहा है इसका जवाब नहीं मिल पाया है। जबकि समिति ने बीजेपी पार्षद को कुछ लोगों को तालाब में मछली मारते रंगे हाथों पकड़ा भी गया है और मामला दर्ज होने के लिए पर्याप्त साक्ष्य के रूप में उन्होंने मोबाइल के कैमरे में कैद की है तस्वीरें भी सामने रखी है ।

अब निगाहें पुलिस और प्रशासन पर हैं। यदि शिकायत में पर्याप्त तथ्य हैं तो कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई होना चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए। कयास यही भी लगाए जा रहे सत्ता के रसूख के कारण हो सकता है कि मध्यस्थता के माध्यम से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कर मामले को समझौता में खत्म किया जा सकता है ।

