VIDEO –सुशासन तिहार में बाल मजदूरी … मंत्री-अफसरों के सामने बच्चों से कराई गई सेवा ! सरकारी मंच पर बाल श्रम का शर्मनाक खेल ,कैमरे देख भागे कलेक्टर ,मंत्री !

डेस्क खबर ../ छत्तीसगढ़ सरकार भले ही “सुशासन तिहार” का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार में ही सुशासन की तस्वीर सवालों के घेरे में आ गई। मामला गरियाबंद जिले के ग्राम
गरियाबंद जिले के ग्राम पोखरा में आयोजित सरकारी शिविर का है। जहां पर जनपद पंचायत फिंगेश्वर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री, विधायक और कलेक्टर की मौजूदगी में बच्चे नाश्ता और शरबत परोसते नजर आए। चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चों के गले में “सुशासन तिहार” का बैच लगाकर उनसे सेवा कराई जा रही थी। जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उन हाथों में ट्रे थमा दी गई। मंच पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि सब कुछ देखते रहे, लेकिन किसी ने इसे रोकना जरूरी नहीं समझा।
विडंबना देखिए तरह के मामले सामने आने के बाद जहां प्रशासन छोटे दुकानदारों और निजी संस्थानों पर बाल श्रम कानून का डंडा चलाता है, लेकिन जब खुद की बारी आई तो कानून मंच के नीचे दम तोड़ता नजर आया। और जब मीडिया ने इस लापरवाही पर सवाल पूछे, तो जवाब देने की जगह मंत्री और कलेक्टर कैमरे से बचते नजर आए और एक झूठी हंसी दिखाकर इस गंभीर मामले में जवाब देने के बजाय चुप्पी साध ली , जिम्मेदारों चुप्पी साफ बता रही है कि सवालों का जवाब सिस्टम के पास नहीं है।

अब सबसे बड़ा सवाल —क्या सरकारी कार्यक्रमों में कानून सिर्फ आम जनता के लिए लागू होता है?क्या बच्चों के अधिकार सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं?और क्या यही है सरकार का तथाकथित “सुशासन”
अब सवाल उठ रहा है — क्या यही है सुशासन?
जहां बच्चों के अधिकारों की कीमत पर सरकारी आयोजन चमकाए जा रहे हैं और जनता के बीच वाहवाही लूटी जा रही है ।
