बलरामपुर वनमण्डल के संवेदनशील तेंदूपत्ता फड़ों का निरीक्षण, अवैध परिवहन रोकने सख्त निर्देश.,वनवासी परिवारों को लाभांवित करने के लिए अधिकारियों की पहल

डेस्क खबर ../ बलरामपुर जिले केप्रबंध संचालक/वनमंडलाधिकारी बलरामपुर एवं उप प्रबंध संचालक बलरामपुर द्वारा सीमावर्ती राज्य मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश से लगे संवेदनशील समिति एवं तेंदूपत्ता फड़ों का सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान प्राथमिक लघु वनोपज समिति ढढीया अंतर्गत फड़ ढढीया एवं कछिया का भ्रमण कर कर्मचारियों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीड़ी निर्माण योग्य 50 पत्तों की गड्डी संग्रहण करने के निर्देश दिए गए।

इसके पश्चात वन परिक्षेत्र रघुनाथनगर अंतर्गत मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश सीमावर्ती क्षेत्र के गिरवानी, केसारी, बभनी, झापर एवं चपोता फड़ों का निरीक्षण किया गया। साथ ही बिचौलियों द्वारा अवैध तेंदूपत्ता परिवहन की रोकथाम हेतु बनाए गए अस्थायी बैरियरों का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों ने संबंधित पोषक अधिकारियों एवं समिति प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल अच्छी गुणवत्ता युक्त बीड़ी निर्माण योग्य 50 पत्तों की गड्डी ही क्रय की जाए तथा अवैध तेंदूपत्ता की रोकथाम हेतु प्रभावी पहल सुनिश्चित की जाए। लापरवाही अथवा संलिप्तता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी गई।
निरीक्षण के दौरान अंतरराज्यीय बैरियर धनवार का भी अवलोकन किया गया, जहां बैरियर पंजी की जांच कर वाहनों की सघन जांच करने के निर्देश दिए गए, ताकि अवैध वनोपज परिवहन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

वनमंडलाधिकारी ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने परिक्षेत्र अंतर्गत संवेदनशील फड़ों का चिन्हांकन कर सतत निरीक्षण एवं बैठकें आयोजित करें। फड़मुंशियों, समिति प्रबंधकों एवं पोषक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने कहा गया कि अन्य राज्यों से अवैध तेंदूपत्ता लाकर बिक्री की कोई घटना न होने पाए। इसके लिए संबंधित थाना प्रभारियों से समन्वय स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए

साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि संग्राहकों से संग्रहित तेंदूपत्ता गड्डियों की संख्या, बोरा भराई एवं भंडारण कार्य संघ मुख्यालय रायपुर के निर्देशानुसार समय पर पूर्ण किया जाए। तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान वनाग्नि से बचाव हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश देने पर भी विशेष जोर दिया गया।

अधिकारियों ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि संग्राहकों को उनका उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो सके तथा वनवासी परिवार अधिक से अधिक लाभांवित हो सकें।