

डेस्क खबर बिलासपुर../ बिलासपुर जिले के तहसील सकरी के ग्राम पंचायत चिचिरदा में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का मामला अब गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है। खसरा नंबर 601 की लगभग 2.84 एकड़ जमीन पर कथित रूप से आनंदी बिल्डर्स (लल्लन तिवारी) द्वारा डामर प्लांट संचालित किया जा रहा था, जिसे लेकर तहसीलदार न्यायालय ने 20 मार्च 2026 को बेदखली का स्पष्ट आदेश जारी किया था। आदेश में निर्देश दिया गया था कि कब्जा स्वयं हटाया जाए, अन्यथा प्रशासन शासकीय खर्च पर कार्रवाई करेगा। लेकिन आदेश के बावजूद अब तक जमीन खाली नहीं की गई है, जिससे प्रशासनिक कार्यवाही की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।

किरायानामा छुपाने का आरोप
स्थानीय आवेदक का आरोप है कि यह जमीन पहले से ही रामकुमार दुबे और हीरामणि दुबे द्वारा सीमेंट खंभा और तार जाली लगाकर कब्जे में रखी गई थी, जिसे वर्ष 2010 से कथित रूप से 35 हजार रुपये मासिक किराए पर आनंदी बिल्डर्स को दिया गया।
आरोप के मुताबिक अब तक करीब 63 लाख रुपये का किराया बनता है, लेकिन इस संबंध में कोई किरायानामा सकरी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले को दबाने और संबंधित लोगों को बचाने की आशंका जताई जा रही है।


“मुझे क्यों परेशान कर रहे हो”—आरोप
आवेदक का यह भी दावा है कि स्वयं लल्लन तिवारी के पुत्र निशांत तिवारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने यह भूमि दुबे परिवार से किराए पर ली है और इस मामले में सीधे उन्हीं से बात करने को कहा।


पंचायत स्तर पर भी दबाव के आरोप
बेदखली आदेश के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर भी विवाद बढ़ गया है। आरोप है कि पंचायत सचिव पर फर्जी प्रस्ताव और टैक्स रसीद जारी करने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि एसडीएम कोर्ट से स्टे हासिल किया जा सके और कार्रवाई को रोका जा सके।


प्रशासन की भूमिका पर सवाल
तहसीलदार न्यायालय के स्पष्ट आदेश और समयसीमा के बावजूद कब्जा नहीं हटना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं प्रभावशाली संरक्षण का खेल चल रहा है। स्थानीय लोगों में भी इसको लेकर नाराजगी देखी जा रही है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शासकीय जमीन की जब बिल्डर के कब्जे से खाली करवा पाता है टी।
यदि प्रशासन जल्द सख्त कार्रवाई नहीं करता।