

डेस्क खबर बिलासपुर./ बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र में रेत माफिया खुलेआम बिना परमिशन के बेखौफ होकर रेत चोरी कर रहे है । अक्सर छोटी मोटी कार्यवाही पर मीडिया की सुर्खियों में रहने वाला स्थानीय प्रशासन भी अब जमीनी हकीकत में फुस्स साबित हो रहा है। कागज़ों में सख्ती और कार्रवाई के दावे भले तेज हों, लेकिन रतखंडी रेत घाट पर तस्वीर बिल्कुल उलट है। यहाँ खनिज विभाग नहीं, रेत माफिया के ट्रैक्टर फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं और प्रशासन की मौजूदगी कहीं दिखाई नहीं देती। कैमरे में कैद इन तस्वीरों में कैद ट्रैक्टरों के रैला से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह रेत माफिया बेखौफ है और प्रशासन खामोश है ।
यहां से रोज सैकड़ों गाड़िया रेत निकाली जा रही है और महीने में हज़ारों गाड़िया रेत निकाल के रेत माफिया मालामाल हो रहे है ।
घाट पर दिनदहाड़े अवैध रेत उत्खनन जारी है। जेसीबी मशीनें नदी का सीना चीर रही हैं, ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रक बिना किसी रोक-टोक के रेत ढो रहे हैं। न कोई परमिट, न कोई कार्रवाई—मानो कानून ने यहाँ से मुंह मोड़ लिया हो। सुबह से लेकर शाम तक यह खेल लगातार चलता है, और जिम्मेदार विभाग केवल फाइलों में ‘सख्त कार्रवाई’ का दावा करता रहता है।

स्थानीय ग्रामीणों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जब सब कुछ कैमरों में कैद है, तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर मिलीभगत? ग्रामीणों का आरोप है कि छोटे किसानों पर सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन माफिया के बड़े नेटवर्क को खुली छूट दी जा रही है। रतखंडी रेत घाट अब सिर्फ अवैध खनन का केंद्र नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन चुका है। अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन वास्तव में कार्रवाई करता है या फिर “कागजी बुलडोजर” ही चलता रहेगा।