डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट –33 : राशन घोटाला : नहीं थम रहा सरकारी राशन के बदले नगद पैसा देने का सिलसिला.! फिर दुकानदार हुआ मोबाइल के कैमरे में कैद । विक्रेता संघ अध्यक्ष के खिलाफ कब होगी FIR .??

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डेस्क खबर बिलासपुर ./  बिलासपुर जिले में राशन के बदले नगद पैसा देने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है । जिले में अधिकांश दुकानदार गरीबों को दिए जाने वाले सरकारी चावल के बदले नगद पैसा देकर हितग्राहियों का चावल की कालाबाजारी करते हुए जमकर मुनाफाखोरी कर रहे है । शिकायतों के बाद भी जिले में बैठे खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे  बैठे हुए है । ताजा वीडियो बिलासपुर के हेमूनगर स्थित वार्ड के क्रमांक 45 सरकारी राशन दुकान श्री साईंराम खाद्य सुरक्षा पोषण एवं सेवा सहकारी समिति मर्यादित का है जहां दुकानदार राशन के बदले नगद पैसा देते हुए कैमरे में कैद हो गया ।



मगरपारा राशन दुकान घोटाले में कार्रवाई पर सवाल, जांच के बाद भी एफआईआर नदारद

गौरतलब है कि विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय  की मगरपारा क्षेत्र स्थित वार्ड क्रमांक 23 की शासकीय राशन दुकान (आईडी 401001096) में सामने आए गंभीर अनियमितताओं के बावजूद दोषियों पर अब तक आपराधिक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। 07 जून 2025 को खाद्य विभाग द्वारा की गई जांच में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और हितग्राहियों की शिकायतों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि महिला समूह के विक्रेता पात्र हितग्राहियों से चावल के बदले अवैध रूप से पैसे वसूल रहे थे।


जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद 30 जुलाई 2025 को कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा ने दुकान को निलंबित कर दिया। लेकिन कार्रवाई यहीं तक सीमित रह गई। मामले में महिला समूह की अध्यक्ष सत्यशीला उपाध्याय, सचिव पुष्पा दीक्षित और विक्रेता व विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत प्रकरण बनना बताया गया था, इसके बावजूद अब तक थाने में एफआईआर दर्ज नहीं की गई।



सूत्रों के अनुसार, प्रमाणित जांच रिपोर्ट और तत्कालीन कलेक्टर व खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया की रिपोर्ट के बाद भी राजनीतिक दबाव या कथित रिश्तेदारी संरक्षण के चलते कार्रवाई को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एफआईआर में हो रही देरी संदेह को गहरा कर रही है। अब सवाल यह है कि प्रशासन सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगा या कानून के तहत सख्त कार्रवाई कर राशन व्यवस्था की साख बचाएगा। जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं।
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