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डेस्क खबर, बिलासपुर../ जिले की धार्मिक नगरी रतनपुर थाना क्षेत्र के बेलतरा-लिम्हा टोल प्लाजा के पास स्थित कश्यप कोल डिपो एक बार फिर प्रशासनिक ढिलाई और अवैध कारोबार का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। डिपो की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद यहां कोयले का कारोबार खुलेआम जारी है—और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।रतनपुर के बेलतरा-लिम्हा टोल प्लाजा के पास चल रहा कश्यप कोल डिपो इन दिनों बड़े खेल का अड्डा बनता नजर आ रहा है। चौंकाने वाली बात ये है कि डिपो का लाइसेंस कब का खत्म हो चुका है, लेकिन यहां आज भी खुलेआम कोयले का अवैध कारोबार जारी है—जैसे नियम-कानून का कोई मतलब ही नहीं!सूत्रों के मुताबिक, इस डिपो का संचालन आकाश सिंघल द्वारा किराए के आधार पर किया जा रहा है।

हैरानी की बात यह है कि खुद संचालक ने डिपो महीनों पहले लीज खत्म होने के बाद भी अवैध कोल डिपो चलाने की बात स्वीकारी भी थी लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदार अफसर आंख मूंद बैठे हुए है ।, जबकि खनिज विभाग पहले ही साफ कर चुका है कि लाइसेंस खत्म होने के बाद यहां किसी भी प्रकार की खरीदी-बिक्री पूरी तरह अवैध है। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर कोयले का भंडारण और परिवहन होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह कोई पहला मामला नहीं है। आकाश सिंघल के खिलाफ पूर्व में भी अवैध कोल डिपो संचालन को लेकर शिकायत दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद कार्रवाई का अभाव यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं सिस्टम की चुप्पी इस अवैध कारोबार को संरक्षण दे रही है।

इतना ही नहीं मीडिया के माध्यम से रतनपुर क्षेत्र में चल रहे इस अवैध कोल डिपो की जानकारी रतनपुर पुलिस से लेकर खनिज विभाग के अधिकारियों के पास भी महीनों पहले पहुंच चुकी है । एक तरफ जहां रतनपुर पुलिस कभी राज्यपाल का दौरा तो कभी नवरात्र में क्षेत्र में व्यवस्था तो कभी अन्य कारणों में व्यस्त होने की बहानेबाजी कर कार्यवाही से बचती नजर आ रही है तो दूसरी तरफ खनिज विभाग के अधिकारियों के अवैध कोल डिपो की जानकारी होने के बाद भी कार्यवाही करने में हाथ कांप रहे है । सूत्रों की माने तो किराए में चल रहे इस डिपो संचालक को राजनैतिक से लेकर प्रशासनिक संरक्षण मिला हुआ है जिसके चलते लीज खत्म होने के बाद भी इस डिपो में काले कोयले की जमकर खुलेआम अफरा तफरी कर अवैध कोयले का खेल बेखौफ होकर दिन रात चल रहा है । रतनपुर पुलिस और खनिज विभाग दोनों को इस पूरे मामले की जानकारी है, फिर भी न तो जांच हो रही है और न ही कोई ठोस कार्रवाई। न निरीक्षण, न जब्ती—ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसके इशारे पर यह खेल जारी है?
खनिज नियमों के अनुसार, बिना वैध लाइसेंस के खनिज डिपो का संचालन पूरी तरह गैरकानूनी है और इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होना अनिवार्य है। लेकिन यहां नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं।


सूत्र यह भी बताते हैं कि क्षेत्र में ऐसे कई अवैध डिपो सक्रिय हैं, जो बड़े नेटवर्क के तहत बिना रॉयल्टी और टैक्स के कोयले की सप्लाई और कोयले के मिलावट का कार्य कर रहे हैं। इससे शासन को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है और अवैध माफिया मालामाल हो रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करेंगे या फिर कोल माफिया के आगे यूं ही सिस्टम झुकता रहेगा?
सबसे बड़ा सवाल—जब लाइसेंस खत्म है, तो धंधा चालू कैसे?
क्यों जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंख मूंदे बैठे हैं?
क्या कोल माफिया के आगे सिस्टम ने घुटने टेक दिए हैं?
अब देखना ये है कि प्रशासन जागेगा… या फिर ये काला खेल यूं ही चलता रहेगा।
