ना पार्किंग ना अनुमति ,गोलबाजार में ‘मरम्मत’ की आड़ में अवैध कॉम्प्लेक्स! निगम की चुप्पी पर उठे सवाल ! नाले पर अतिक्रमण ,शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य — आखिर किसके संरक्षण में हो रहा खेल?

डेस्क खबर बिलासपुर ./ शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाके गोलबाजार में नियमों को खुलेआम ठेंगा दिखाते हुए एक निर्माणाधीन इमारत ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ महीने पहले आग से क्षतिग्रस्त हुई दुकान की मरम्मत के नाम पर अब वहां एक बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स तेजी से खड़ा किया जा रहा है—वह भी बिना वैध अनुमति के।


मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस से बीजेपी का दामन थामने के बाद से सीएमडी कालेज के चेयरमैन संजय दुबे द्वारा अपने रसूख और राजनैतिक दबाव में इस बहुमंजिला कांप्लेक्स का निर्माण बेखौफ हो कर कराया जा रहा है । शिकायत के अनुसार उन्होंने न तो विधिवत नक्शा पास कराया है, न ही आवश्यक अनुमति ली है। इसके बावजूद निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। जबकि किसी अनहोनी की आशंका से भयभीत रहवासियों ने बाकायदा इसकी शिकायत भी जिम्मेदार अधिकारियों से की लेकिन उसके वावजूद निगम के सभापति के वार्ड में फूल छाप कांग्रेसी का अवैध निर्माण धड़ल्ले से चालू है ।


निगम की ‘अनुमति नहीं’—फिर भी काम जारी!
जब इस पूरे मामले में नगर निगम के भवन शाखा अधिकारी अनुपम तिवारी से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि संबंधित व्यक्ति को अभी तक कोई औपचारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार अनुमति प्रक्रिया जारी है और नजूल एनओसी के लिए आवेदन किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब अनुमति मिली ही नहीं, तो निर्माण किस आधार पर चल रहा है? इतना ही नहीं इस भवन निर्माण के लिए कोई पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं है । वही गोलबाजार में बन रहे इस भवन में भू स्वामी ने नाले पर भी अतिक्रमण का लिया है । इस पर कार्रवाई के सवाल पर अधिकारी की चुप्पी ने और भी संदेह गहरा दिया है।
पार्किंग का अभाव, भविष्य में ट्रैफिक का संकट तय
निर्माणाधीन इमारत में पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी स्थिति अस्पष्ट है। गोलबाजार पहले से ही भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। ऐसे में बिना पार्किंग के कॉम्प्लेक्स बनने से आने वाले समय में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। खुद अधिकारी ने माना कि “पार्किंग तो बनानी पड़ेगी”, लेकिन मौजूदा स्थिति में इसका कोई स्पष्ट इंतजाम नजर नहीं आ रहा।

शिकायतें बेअसर, प्रशासन मूकदर्शक
स्थानीय लोगों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह उठता है कि क्या रसूख के दम पर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है?
या फिर प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है?
स्मार्ट सिटी का सपना या अव्यवस्था का मॉडल?
एक ओर बिलासपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे अवैध निर्माण उन दावों की पोल खोल रहे हैं। अगर इसी तरह नियमों की अनदेखी होती रही, तो शहर में अव्यवस्था और अराजकता का माहौल बनना तय है।
अंतिम सवाल:
जब इमारत पूरी बन जाएगी, दुकानें खुलेंगी और सड़कों पर गाड़ियों का जाम लगेगा—
क्या तब भी जिम्मेदार अधिकारी “मजबूरी” का रोना रोते नजर आएंगे?
यदि कोई आगजनी ,हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी ??
अब भी समय है कि नियमों को लागू कर इस अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई की जाए?