डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट –34: राशन घोटाला : नहीं थम रहा सरकारी राशन के अफरा तफरी का खेल.. बीपीएल राशन पिक अप में भरकर की जा रही पलटी.. कैमरे में हुई  दुकानदार की करतूत कैद तो बिफरा  घोटालेबाज..

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डेस्क खबर बिलासपुर ./  बिलासपुर जिले में खाद्य विभाग के संरक्षण में गरीब जनता के हक के चावल की अफरा तफरी जमकर हो रही है, लगातार चावल के बदले पैसा तो कभी शासकीय राशन की अफरा तफरी का मामला सामने आ रहा है। चावल की अफरा तफरी कर हितग्राहियों का चावल की कालाबाजारी करते हुए जमकर मुनाफाखोरी कर रहे है। बिलासपुर में अपरा पार वॉर्ड क्रमांक 60 जबड़ापारा में दुकान संचालक द्वारा सरकारी चावल की अफरा तफरी कर मुनाफाखोरी की जा रही है.. दुकानदार की इस करतूत का जब मीडियाकर्मी ने वीडियो बनाया तो घोटालेबाज बिफर गया, और कैमरा में वीडियो बनाने वाले व्यक्ति से झगड़ पड़ा.. विरोध करने पर उसने हमला करने की धमकी तक दे डाली, बड़ा सवाल है कि शहर में खुलेआम विभाग की संरक्षण में चल रहे अफरा तफरी को लेकर जानबूझकर आंख क्यों बंद किए हुए है.. मामला सरकंडा अरपा पार स्थित जबड़ा पारा वार्ड नंबर 60 इलाके में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान जिसका आईडी 1074 से जुड़ा हुआ है जहां सरकारी चावल एक पिकअप में पलटी करते हुए साफ देखा जा सकता है



मगरपारा राशन दुकान घोटाले में कार्रवाई पर सवाल, जांच के बाद भी एफआईआर नदारद

गौरतलब है कि विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय  की मगरपारा क्षेत्र स्थित वार्ड क्रमांक 23 की शासकीय राशन दुकान (आईडी 401001096) में सामने आए गंभीर अनियमितताओं के बावजूद दोषियों पर अब तक आपराधिक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। 07 जून 2025 को खाद्य विभाग द्वारा की गई जांच में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और हितग्राहियों की शिकायतों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि महिला समूह के विक्रेता पात्र हितग्राहियों से चावल के बदले अवैध रूप से पैसे वसूल रहे थे।



जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद 30 जुलाई 2025 को कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा ने दुकान को निलंबित कर दिया। लेकिन कार्रवाई यहीं तक सीमित रह गई। मामले में महिला समूह की अध्यक्ष सत्यशीला उपाध्याय, सचिव पुष्पा दीक्षित और विक्रेता व विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत प्रकरण बनना बताया गया था, इसके बावजूद अब तक थाने में एफआईआर दर्ज नहीं की गई।



सूत्रों के अनुसार, प्रमाणित जांच रिपोर्ट और तत्कालीन कलेक्टर व खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया की रिपोर्ट के बाद भी राजनीतिक दबाव या कथित रिश्तेदारी संरक्षण के चलते कार्रवाई को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एफआईआर में हो रही देरी संदेह को गहरा कर रही है। अब सवाल यह है कि प्रशासन सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगा या कानून के तहत सख्त कार्रवाई कर राशन व्यवस्था की साख बचाएगा। जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं।

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