डेस्क खबरबिलासपुर

शपथ ग्रहण समारोह में उपेक्षा से कांग्रेस में गहराती गुटबाजी, तखतपुर बना विवाद का केंद्र.! निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से कांग्रेस में खलबली ..??

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डेस्क खबर बिलासपुर तखतपुर ../ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी के जिला पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही पार्टी के भीतर गुटीय राजनीति एक बार फिर सतह पर आ गई है। पुराने चेहरों को हटाकर नए चेहरों की नियुक्ति के बाद जहां संगठन में संतुलन साधने की चुनौती थी, वहीं अप्रत्याशित नामों की घोषणा और नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़ा दी है।
विशेषकर तखतपुर नगर पालिका के संदर्भ में विवाद गहराता नजर आ रहा है। शपथ ग्रहण समारोह के विज्ञापन में नवनिर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष पूजा मक्कड़ और कांग्रेस की उपाध्यक्ष गौरी अजय देवांगन के नामों का उल्लेख न होना क्षेत्रीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश का कारण बना है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कदम गुटीय और ओछी राजनीति का प्रतीक है, जिसमें नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को भी दरकिनार किया जा रहा है।


गौरतलब है कि बिलासपुर जिले में तखतपुर एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां कांग्रेस की महिला प्रत्याशी ने बड़े अंतर से नगर निकाय चुनाव जीता। भाजपा की लहर के बीच यह जीत कांग्रेस के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि रही। इसके बावजूद पढ़ी-लिखी और सक्षम महिला अध्यक्ष के दमदार प्रदर्शन को संगठन स्तर पर नजरअंदाज किया जाना न केवल स्थानीय कार्यकर्ताओं को आहत कर रहा है, बल्कि इसे महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण पर चोट के रूप में भी देखा जा रहा है।


क्षेत्रीय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि पिछले पांच वर्षों से तखतपुर को “उपनिवेश” की तरह देखने वाले नेता विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद क्षेत्र से किनारा करते नजर आए और जमीनी कार्यकर्ताओं की सुध नहीं ली। ऐसे में निकाय चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद भी उपेक्षा होना संगठनात्मक असंतोष को और बढ़ा रहा है।
कार्यकर्ताओं का सवाल है कि उभरती हुई महिला नेत्री को लेकर यह कैसी राजनीति है? क्या यह रवैया कांग्रेस के लिए घातक सिद्ध नहीं होगा?
स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि गुटबाजी पर अंकुश लगे और संगठन को एकजुट कर आगे बढ़ाया जा सके—अन्यथा यह आंतरिक खींचतान पार्टी के भविष्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए जारी किए विज्ञापन में महिला जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से पार्टी के भीतर मचे घमासान को कांग्रेस पार्टी कैसे मैनेज करती है और कब इस बारे में प्रतिक्रिया जारी करती है ।

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