छत्तीसगढ़डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट –30 : राशन घोटाला  : रजत जयंती चावल उत्सव की चमक के बीच बिलासपुर की राशन दुकानों की बदहाल हकीकत, चूहों और गंदगी से उठे सवाल.!! उत्सव की थाली में चावल, दुकानों की कोठरी में चूहे ! अधिकारियों की लापरवाही के कारण आम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ .!!




डेस्क खबर बिलासपुर../ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेशभर में गरीबों को दिए जाने वाले राशन के लिए रजत जयंती चावल उत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस उत्सव के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 25 वर्षों की उपलब्धियों का जश्न मनाया जा रहा है और हितग्राहियों को खाने लायक साफ  चावल वितरण किया जा रहा है। शासन की इस पहल से आम जनता में उत्साह और उम्मीद का माहौल देखने को मिल रहा है।



हालांकि, इस चमकदार उत्सव की तस्वीर के ठीक उलट ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। बिलासपुर सहित कई क्षेत्रों की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में गंदगी, अव्यवस्थित भंडारण और चूहों के बढ़ते आतंक ने राशन वितरण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। वही ऐसी दुकानों और अव्यवस्था करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने से हितग्राहियों को दूषित और गंदा चावल देने का सिलसिला जारी है ।



कई राशन दुकानों में चावल के बोरे खुले में रखे हुए हैं। साफ-सफाई का अभाव साफ नजर आता है, वहीं चूहों द्वारा बोरे कुतरने और राशन सामग्री को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कुछ दुकानों में चूहे खुलेआम घूमते हुए देखे जा रहे हैं, जिससे चावल और अन्य खाद्यान्न के दूषित और जानलेवा होने का खतरा बढ़ गया है।



ऐसा भी नहीं है कि जिले में खाद्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी का यह कोई पहला मामला है । पूर्व में भी इस तरह की तस्वीरें सामने आ चुकी है पर अधिकारियों की मिलीभगत के कारण बिलासपुर की जनता दूषित चावल लेने के लिए मजबूर है , और ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यह है कि ऐसा असुरक्षित और गंदा खाद्यान्न सीधे जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंच रहा है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार जहां एक ओर उत्सव मना रही है, वहीं दूसरी ओर राशन दुकानों की निगरानी, रख-रखाव और स्वच्छता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।


रजत जयंती चावल उत्सव का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंदों को सम्मान और सुरक्षित खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि वितरण केंद्र ही अस्वच्छ और अव्यवस्थित होंगे, तो शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना की सार्थकता पर सवाल उठना लाजमी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब और क्या कार्रवाई करता है। और कब तक गरीबों की जान से खिलवाड़ करने वाले राशन दुकानों पर कार्यवाही होती है ।

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