
डेस्क खबर बिसालपुर ../ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के चावल की अफरा तफरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि खाद्य विभाग की नाक के नीचे सेंटिंग के जरिए चावल की अफरा-तफरी का खेल लंबे समय से चल रहा है। मामला तब और तूल पकड़ गया, जब शहर के शुरुआती छोर पर स्थित सकरी थाना का नाम भी चर्चाओं में आने लगा। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, शहर से पीडीएस चावल लेकर जा रही एक गाड़ी को चेकिंग के नाम पर रोका गया ,बिलासपुर की तरफ से कोटा तखतपुर जा रही गाड़ी को थाने से चन्द कदम पहले रोकने के बाद बिना थाना प्रभारी की जानकारी के बाद रवाना भी कर दिया गया । सूत्रों की माने तो सकरी थाने में पदस्थ महिला प्रधान आरक्षक और एक आरक्षक ने कार्यवाही का डर दिखाकर सेटिंग कर लेनदेन कर मामले को रफा दफा कर दिया ।

गाड़ी में गरीबों को दिए जाने वाले सरकारी चावल होने के बाद कार्रवाई के बजाय कथित तौर पर ‘सेटिंग’ का खेल शुरू हो गया। चर्चा है कि चावल से भरी गाड़ी को छोड़ने में एक महिला और एक पुरुष आरक्षक की भूमिका संदिग्ध रही। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सूत्रों का दावा है कि जिस जगह गाड़ी रोककर सेटिंग की जा रही थी वह घटनास्थल सीसीटीवी कैमरें की जद में जरूर आता होगा और इसकी पुष्टि सीसीटीवी से करा कर मामले का सच सामने लाया भी जा सकता है ।

इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की निगरानी करने वाली व्यवस्था पर यदि मिलीभगत के आरोप लगते हैं, तो आम जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। अब देखना होगा कि सूत्रों से मिली जानकारी के बाद यह खबर सच साबित होती है या अफवाह ? इसका सच तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच के बाद ही पता चल पाएगा ।


वैसे भी लगातार चावल की कालाबाजारी संबंधित खबर वायरल होने के बाद भी यह स्पष्ट है कि जिले में सरकारी चावल की कालाबाजारी कर जमकर मुनाफाखोरी की जा रही है और इस मामले में खाद्य विभाग से लेकर पुलिस विभाग का चावल तस्करो को संरक्षण मिला हुआ है जिसके कारण गरीबों के हक का निवाला खाने वाला चावल चोर सिंडिकेट गिरोह बेखौफ सरकारी चावल की तस्करी में जुटा हुआ है । विभागीय सूत्रों की माने तो खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर ने तो अपनी कुर्सी दांव में लगाकर विक्रेता संघ के अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ एफआईआर को रोकने के लिए बिलासपुर कलेक्टर से लेकर हाईकोर्ट सहित पत्रकारों को गुमराह किया हुआ है और तत्कालीन खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया की पुख्ता जांच रिपोर्ट की फाइल को दबा कर रखा हुआ है ताकि ऋषि उपाध्याय कलेक्टर की अनुशंसा पर मामला दर्ज होने से बचाया जा सके .??
विभागीय सूत्रों का कहना है कि ऋषि उपाध्याय द्वारा संचालित यदि सरकारी दुकान के खिलाफ निष्पक्ष जांच की जाये तो चावल की हेराफेरी के चौंकाने वाले खुलासे हो सकते है और आईडी 401001096 की दुकान के खिलाफ हुई विभागीय जांच की रिपोर्ट पर समिति के अध्यक्ष सचिव सहित समिति के लोगो तक जेल जाना पड़ सकता है यदि खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर ऋषि उपाध्याय के चावल चोरों को विभागीय संरक्षण देने के बजाय विभागीय जांच रिपोर्ट को सार्वजिक कर दे !!
