
छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। शनिवार, 21 फरवरी 2026 को निर्वाचन आयोग ने संशोधित अंतिम सूची जारी करते हुए बताया कि दावा-आपत्ति चरण के बाद लगभग 2.35 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। यह अभियान 27 अक्टूबर से प्रारंभ हुआ था और 23 दिसंबर 2025 को प्रारूप सूची सार्वजनिक की गई थी।
आयोग के अनुसार, प्रारंभिक आंकड़ों में कुल 2 करोड़ 12 लाख से अधिक मतदाता दर्ज थे। पुनरीक्षण के दौरान प्राप्त गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के बाद मृतकों, एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण और पते में बदलाव जैसे कारणों से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। इसके पश्चात 23 दिसंबर से 21 जनवरी तक आपत्तियां और दावे स्वीकार किए गए। 14 फरवरी 2026 को इनके निस्तारण के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर लगभग 1 करोड़ 87 लाख 30 हजार से अधिक हो गई, जो प्रारूप सूची की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है।
इधर, प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम सुनियोजित ढंग से हटाए गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया कि अनेक मतदान केंद्रों से गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए नाम कटवाने की कोशिश की।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने सूची को पारदर्शी प्रक्रिया का परिणाम बताया है। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है।