डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट –41– राशन घोटाला : रिश्वतखोर खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार 90 हजार लेते रंगे हाथ पकड़ाया.. पूर्व में भी शिकायतों का अंबार, मुख्यालय अटैचमेंट हटाकर बिना जांच अधिकारी ने क्यों दिया था मस्तूरी का प्रभार ??  किस अधिकारी के संरक्षण में चल रहा था लूट खसोट का खेल ?? खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर की भूमिका संदेह के घेरे में .!!




डेस्क खबर बिलासपुर../ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लॉक में पदस्थ खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है.. मिली जानकारी के अनुसार, खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार ने ग्राम पंचायत विद्याडीह के शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालक से कार्रवाई न करने के एवज में 1 लाख 20 हजार रुपए की मांग की थी.. बताया जा रहा है कि दुकानदार द्वारा पहले ही 30 हजार रुपए दिए जा चुके थे, लेकिन इसके बाद भी आरोपी निरीक्षक ने शेष 90 हजार रुपए देने के लिए दबाव बनाया, परेशान दुकानदार ने इसकी शिकायत एसीबी से की.. शिकायत की पुष्टि के बाद एसीबी टीम ने जाल बिछाया और आरोपी खाद्य निरीक्षक को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया.. जिसके बाद आज एसीबी की टीम ने आरोपी को न्यायलय पेश किया जहां, माननीय न्यायालय ने रिश्वतखोर खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार को 15 दिन की न्यायिक हिरासत पर जेल दाखिल करने का आदेश दिया..मिली जानकारी के अनुसार आज PSC परीक्षा में रिश्वतखोर इंस्पेक्टर को शामिल होना था लेकिन उससे पहले ही वसूली का पर्दाफाश करते हुए acb की टीम ने जेल भेज दिया है । हालांकि बताया जा रहा है कि कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद भ्रष्ट अधिकारी परीक्षा में शमिल हो सकता है ।




खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार पर पूर्व में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं.. तखतपुर में पदस्थापना के दौरान गनियारी स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालक से ऑनलाइन माध्यम से रिश्वत लेने के बाद भी कार्रवाई करने का मामला सामने आया था.. इतना ही नहीं लगातार शिकायतों के बाद मामले में संज्ञान लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर को जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिसके बाद खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर ने आरोपी को मुख्यालय अटैच किया था.. लेकिन कुछ दिनों बाद ही मस्तूरी प्रभारी मंगेश कांत के 1 सप्ताह के लिए छुट्टी में जाने बाद पूर्ण रूप से प्रभार दे दिया गया, और मंगेश कांत के वापस आने के बाद भी स्थिति को यथावत रखा गया.. इधर खुद मुख्यालय अटैच करने के बाद भी अमृत कुजूर ने श्याम वस्त्रकार के खिलाफ न तो जांच की और न ही कोई रिपोर्ट तैयार हुई, ऐसे में सवाल उठता है कि, लगातार शिकायतों, भ्रष्टाचार के साक्ष्य के बावजूद भी बिना जांच बिना कार्रवाई या बिना शिकायतकर्ता के बयान के बाद श्याम वस्त्रकार को मस्तूरी की जिम्मेदारी दे दी गई.. इधर कुछ दिनों पूर्व भी रायपुर एसीबी से बिलासपुर कलेक्टर को श्याम वस्त्रकार के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की शिकायत की जांच को लेकर पत्र आया था लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा संरक्षण का खेल यूं ही खेला जाता रहा, जिसकी वजह से खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार और भी निडर होकर इस तरह के काम को अंजाम देने लगा । विभागीय सूत्रों का दावा है कि खाद्य नियंत्रक अपने अधिनस्थ कर्मचारी के इशारे में पूरा काम करते है जो कि पिछले 7 सालों से जिले में बैठा हुआ है और अपने आप को राजनैतिक और मीडिया से मधुर संबंध का हवाला देकर पूरे चावल चोरों को संरक्षण देने में अहम भूमिका निभा रहा है ।



इसी तरह बिलासपुर शहर में भी ऐसे दुकानदार है जो खुद को शासकीय उचित मूल्य दुकान संगठन का खुद को अध्यक्ष बताते है और खुद ही भ्रष्टाचार को हवा देते हैं, शहर के मगरपारा इलाके  में स्थित आईडी 401001096 की जय महालक्ष्मी स्व सहायता समूह के संचालक ऋषि उपाध्याय द्वारा पीडीएस चावल की अफरा तफरी की जाती रही है, जिसकी जानकारी खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर को भी है लेकिन इसके बावजूद जानकार भी अनजान बनने का खेल विभागीय अधिकारियों द्वारा खेला जा रहा है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खाद्य नियंत्रक को राशन की अफरा तफरी की पूरी जानकारी है और घोषणा पत्र के नाम पर दुकानदारों से महीने के नाम पर एक निश्चित राशि की भी वसूली होती है ?? लेकिन अपने पद का दुरूपयोग करते हुए खाद्य अधिकारी चावल चोरों को बचाने के लिए ऋषि उपाध्याय के खिलाफ विभाग द्वारा की गई पुख्ता जांच रिपोर्ट की फाइल को दबा के बैठे हुए है । इतना ही नहीं खाद्य अधिकारी ने इस मामले में मीडिया को भी जवाब देने से बचते नजर आते है।



सरकारी चावल की कालाबाजारी पर सवाल, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की उठी मांग !!

बिलासपुर जिले में सरकारी चावल की कथित कालाबाजारी को लेकर लगातार खबरें सामने आने के बावजूद कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि गरीबों के लिए निर्धारित पीडीएस चावल की अवैध खरीद-फरोख्त कर मुनाफाखोरी की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि तस्करी में लिप्त तत्वों को विभागीय और राजनैतिक संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण कार्रवाई प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ पा रही है। खाद्य नियंत्रक अमृत कुजुर द्वारा पुख्ता सबूत होने के बाद भी का कार्यवाही नहीं करना उन्हें संदेह के घेरे में खड़े कर रहा है ??



विभागीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर पर विक्रेता संघ के अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लग रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।आईडी 401001096 से संबंधित शासकीय उचित मूल्य दुकान की जांच रिपोर्ट को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है। प्रदेश स्तर के चावल विक्रेता संगठनों का कहना है कि यदि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो, तो सच्चाई सामने आ सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। चावल चोरों में इस कार्यवाही के बाद जमकर चर्चा है कि सिंडिकेट चावल चोरों को संरक्षण देने के लिए विभाग ने भी अपनी सिंडिकेट टीम बना के रखी हुई है और पूरे खेल में सबकी जेब गर्म हो रही है और सरकार की साख पर बट्टा लग रहा है ।

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