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गेम की लत ने छीनी मासूमियत: किशोर हुए कर्ज़दार, माता-पिता हैरान”


डेस्क खबर आजकल ऑनलाइन गेमिंग बच्चों और टीनएजर्स के लिए सिर्फ़ मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि कई बार यह खतरनाक लत का रूप भी ले रही है। हाल ही में इंडौर की 16 वर्षीय लड़की का मामला सामने आया, जिसने एक फ्री गेमिंग ऐप पर शुरुआत की। पहले वह केवल मज़े के लिए खेलती रही, लेकिन जैसे-जैसे स्कोर बढ़ता गया, जीत की झलक ने उसे और बड़े दांव खेलने के लिए उकसाया। धीरे-धीरे उसने ऐप में पैसे लगाना शुरू कर दिया और हार की भरपाई करने के लिए छोटे-छोटे लोन तक उठा लिए। कुछ ही महीनों में उस पर लगभग 80 हज़ार रुपये का बोझ चढ़ गया।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति “कसीनो सिंड्रोम” जैसी होती है, जहां हर हार को जीत में बदलने की चाह बच्चों को लगातार निवेश की ओर धकेलती है। यही कारण था कि इस किशोरी ने दोस्तों, रिश्तेदारों और यहां तक कि लोन ऐप्स से भी रकम जुटाई। हार के साथ उसका आत्मविश्वास घटा, पढ़ाई छूटने लगी, खानपान बिगड़ गया और वह भावनात्मक तौर पर पूरी तरह टूटने लगी।

पुणे से आया दूसरा मामला और भी चौंकाने वाला है। सिर्फ़ 13 साल का एक लड़का अपनी मां का यूपीआई पिन याद कर बैठा और खाते से करीब 2 लाख रुपये उड़ाकर वर्चुअल हथियार खरीद डालें।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अब माता-पिता को बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर सतर्क नज़र रखना बेहद ज़रूरी है। मोबाइल पर गेम सिर्फ़ टाइमपास नहीं, बल्कि एक अदृश्य जाल भी बन सकता है जो धीरे-धीरे बच्चों की मानसिक और आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित कर देता है।

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